श्रीकृष्ण जन्मभूमि के प्राचीन स्वरूप की पुनर्स्थापना की कामना, शंकराचार्य ने दिया बड़ा संदेश
श्रंगेरी शारदा पीठ के उत्तराधिकारी जगद्गुरु शंकराचार्य विधुषेखर भारती महाराज ने कहा कि कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेकर जिस प्रकार श्रीवासुदेवजी एवं देवकीजी को बन्धन मुक्त किया उसी प्रकार भगवान हमारे जीवन के अज्ञान और अहंकार रूपी बन्धनों को नष्ट करें, जिससे हम मानव जीवन के वास्तविक लक्ष्य को प्राप्त कर सकें। शंकराचार्य ने श्रीकृष्ण-जन्मभूमि के विकास, विस्तार एवं प्राचीन स्वरूप की पुनर्स्थापना के लिए भी कामना की। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के लीला मंच से अपने उद्बबोधन के पश्चात् शंकराचार्य ने श्रंगेरी पीठ से लाये गये विशिष्ट प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरत किया। इसके बाद उन्होंने जन्मस्थान स्थित गोशाला में विचरण कर रहे गोवंश का पूजन कर अपने हाथों से आहार भी गृहण कराया।
सायंकाल गीता-जयन्ती महोत्सव महा प्रसाद का वितरण हुआ। इससे पूर्व मंगलवार को प्रात: घण्टे, घड़ियाल, मृदंग, ढोल एवं मजीरे की मंगल ध्वनि के मध्य शंकराचार्य ने सर्वप्रथम भगवान श्रीकेषवदेव का पुष्पार्चन किया। इसके बाद मॉं योगमाया का पूजन एवं आरती वैदिक परंपराओं के अनुसार की। श्रीगर्भ-गृह के दर्शन पूजन एवं तुलसी अर्पित करने के उपरान्त शंकराचार्य ने श्रीराधा कृष्ण युगल सरकार को वृहद पुष्पांजलि अर्पित की। श्रीकृष्ण-जन्मभूमि के दर्शन एवं दो दिवसीय प्रवास के लिए पहुंचे शंकराचार्य का रजत मंगल कलश, पुष्प-गुच्छ एवं मंगल आरती के साथ संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने स्वागत किया।
