बीएसए कॉलेज विवाद: प्रिंसिपल और प्रबंध समिति आमने-सामने, ‘एकल संचालन’ पर छिड़ी जंग
बाबू शिवनाथ अग्रवाल महाविद्यालय की कुलपति द्वारा सशर्त अनुमोदित प्रबंध समिति व श्री अग्रवाल शिक्षा मंडल के पदाधिकारियों ने आयोग द्वारा चयनित प्राचार्य डा. ललित मोहन शर्मा की योग्यता पर सवाल खड़े करते हुए जबरन एकल संचालन जारी रखने के आरोप लगाए हैं। पदाधिकारियों ने कहा है कि अनुमोदन न मिलने का फायदा उठाते हुए प्राचार्य द्वारा बाहरी लोगों का पैसा लगवाया जा रहा है, जबकि कालेज पर पैसे की कमी नहीं है। रविवार को स्थानीय होटल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पदाधिकारियों ने कहा कि कुलपति के अनुमोदन के बाद बीएसए कालेज में एकल संचालन खत्म हो गया है।
अनुमोदन के बाद भी प्रबंध समिति को कालेज में बैठक तक नहीं करने दी जा रही है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की गयी है। कुलपति को भी पत्र भेजा गया है। इसके साथ ही बैंकों को भी पत्र भेजते हुए एकल संचालन खत्म करने को कहा है। बीएसए इंजीनियरिंग कालेज के चेयरमैन उमाशंकर अग्रवाल एडवोकेट ने कहा कि श्री अग्रवाल शिक्षा मण्डल द्वारा 10 संस्थायें मथुरा में जनहित में बिना किसी स्वार्थ व लाभ के चल रहा है, उनमें से एक बीएसए डिग्री कॉलेज है। बीसीए डिग्री कॉलेज अपने में एक स्वतंत्र सोसाइटी है। अनुमोदन न होने का फायदा उठाते हुए प्राचार्य ने चार साल से मालिक बनकर काम किया। प्रिंसिपल को केवल एकेडमिक कार्य होता है। परंतु, उन्होंने प्रबंध तंत्र के अधिकारों का दुरुपयोग किया तथा फर्जी अग्रवाल शिक्षा मंडल के सदस्यों को अपने साथ लेकर उनकी आड़ में उनका पूरी तरह दुरुपयोग किया है, जिसकी पूरी तस्वीर समाज में पूरी तरह साफ है। अग्रवाल शिक्षा मंडल के मंत्री किशोर कुमार अग्रवाल ने बताया कि इन सब बातों से प्राचार्य डॉ. ललित मोहन शर्मा अपने मनमानी अधिकारों को खिसकता देखकर एकदम आग बबूला हो गए हैं तथा किसी भी तरह विद्यालय पर एक क्षत्र राज रखना चाहते हैं, जिसके लिए वह महाविद्यालय छात्रों स्टाफ को भ्रमित कर झूठा प्रकाशन करते हैं तथा कानून की बात को नहीं मानने को तैयार हैं। श्री अग्रवाल शिक्षा मंडल द्वारा कोई भी किसी भी तरह की अनियमितता कभी नहीं की गई है और न ही श्री अग्रवाल शिक्षा मंडल के किसी सदस्य ने महाविद्यालय की जमीन की खरीद फरोख्त की है, क्योंकि महाविद्यालय को दी गई सभी जमीन श्री अग्रवाल शिक्षा मंडल की है।
