बिहार के किसानों के लिए नई राह: जलजमाव वाले खेतों में अब कौन सी फसल लाएगी खुशहाली?
जलवायु परिवर्तन के दौर में बारिश देर से आने से खेतों में जलजमाव एवं नमी की अधिकता से किसान रबी की खेती में पिछड़ गए हैं। दरभंगे जिले के अधिकांश किसानों के खेतों में अभी भी पानी भराव से अधिक नमी है, जिससे उनकी मुख्य फसल गेहूं की खेती में बहुत देर हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए जाले कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यान विज्ञानी डा. प्रदीप विश्वकर्मा ने किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
उन्होंने बताया कि जलवायु के बदलते परिवेश में आमदनी अधिक हो, इसके लिए सब्जियों की खेती बेहतर विकल्प है। किसान सब्जियों जैसे फूलगोभी, पत्तागोभी, टमाटर, बैंगन, मिर्ची और शिमला मिर्च की पहले से तैयार की हुई नर्सरी से पौधे प्राप्त कर अपने खेतों में रोपाई करके आमदनी दोगुनी कर सकते हैं।
इसके अलावा, ऐसे इलाके जहां पानी सूखने की उम्मीद बिल्कुल नहीं है, उसको एक सुनहले अवसर के रूप में इस्तेमाल करके मखाना की खेती करना चाहिए। मखाना की खेती के लिए तालाब में सीधे बीज बोआई एवं नर्सरी लगाने के लिए अभी का समय उपयुक्त है। मखाना की खेती से किसान बाढ़ की समस्या से निदान के साथ अच्छी आमदनी भी प्राप्त कर सकते हैं।
फसल की बोआई से पहले सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट की 100 से 125 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से खेतों में अच्छी तरह बिखेरकर जुताई करना चाहिए। इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है। जुताई के समय 50 किलोग्राम यूरिया, 80 किलोग्राम डीएपी, 60 किलोग्राम पोटाश और 20 से 30 किलोग्राम गंधक प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में मिलाना चाहिए। इससे खेत की उर्वरा शक्ति में बढ़ोतरी होगी और फसल की पैदावार भी बेहतर होगी।
