चीन को हथियार बेचने के दावे पर डोनाल्ड ट्रंप का यू-टर्न, राजदूत की बात को नकारा | world news
अमेरिका के राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को हथियार बेचने के अपने ही राजदूत के दावे से किनारा कर लिया। चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू ने हाल ही में एक इंटरव्यू में दावा किया था कि ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से पूछा था कि क्या उनका देश अमेरिका से हथियार खरीदना पसंद करेगा। इस बयान के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी विदेश नीति को लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। [world news]
मामले तूल पकड़ने पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने इस बात से साफ इनकार किया कि उन्हें ऐसी किसी भी बातचीत की कोई जानकारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस संबंध में अपने राजदूत से बातचीत करेंगे। हालांकि, अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिकी हथियार दुनिया में सबसे बेहतरीन हैं, ऐसे में चीन को हथियार बेचना कोई बुरा विचार नहीं हो सकता। ट्रंप के इस विरोधाभासी बयान ने रणनीतिक विश्लेषकों को भी असमंजस में डाल दिया है।
ट्रंप के बयान के तुरंत बाद अमेरिकी विदेश विभाग ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि मौजूदा अमेरिकी कानून चीन को हथियार बेचने की बिल्कुल इजाजत नहीं देते हैं। विभाग की तरफ से यह भी साफ किया गया कि बीजिंग को हथियार बेचने का न तो कोई आधिकारिक प्रस्ताव विचाराधीन है और न ही ऐसी कोई योजना बनाई गई है। बता दें कि अमेरिका ने आखिरी बार 1980 के दशक में चीन को सैन्य उपकरण बेचे थे। ताइवान को हथियारों की आपूर्ति के मुद्दे पर अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं, और इस तरह के बयानों से वैश्विक कूटनीति में नई बहस छिड़ गई है।
