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टाटा संस का आईपीओ रोकने के लिए नोएल टाटा का बड़ा दांव, सामने आया पुनर्गठन प्लान | india business news

By Sep 29, 2026

टाटा ग्रुप के भीतर चल रहे घटनाक्रमों के बीच टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस की लिस्टिंग टालने के लिए एक नया मास्टरस्ट्रोक चला है [india business news]। भारतीय रिजर्व बैंक के कड़े नियमों और अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी के दायरे से बचने के लिए टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के बोर्ड को एक अहम पुनर्गठन प्रस्ताव सौंपा है। इस योजना के जरिए समूह के मालिकाना हक और व्यावसायिक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी है।

क्या है रीस्ट्रक्चरिंग का पूरा प्लान

इस रणनीतिक प्रस्ताव के तहत टाटा ग्रुप की दो प्रमुख गैर-लिस्टेड कंपनियों—टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स—का विलय सीधे टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड में किया जाएगा। इस विलय के बाद बनने वाली नई संयुक्त इकाई का परिचालन राजस्व बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाने की उम्मीद है। इस बदलाव से कंपनी की वित्तीय आय का अनुपात कुल आय के मुकाबले कम हो जाएगा, जो इसे नियमों के तहत एक अलग श्रेणी में खड़ा करेगा।

आरबीआई के नियमों से बचने की रणनीति

केंद्रीय बैंक के प्रावधानों के अनुसार यदि किसी कंपनी का परिचालन राजस्व उसकी कुल आय का एक बड़ा हिस्सा बनता है, तो वह सख्त एनबीएफसी श्रेणी से बाहर हो सकती है। इस विलय के बाद टाटा संस का निवेश अनुपात निर्धारित सीमा से नीचे आ जाएगा, जिससे कंपनी को अनिवार्य रूप से शेयर बाजार में उतरने या आईपीओ लाने की बाध्यता से कानूनी छूट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। टाटा ट्रस्ट्स का शुरू से यह रुख रहा है कि टाटा संस को एक प्राइवेट होल्डिंग कंपनी के रूप में ही काम करना चाहिए।

भविष्य की राह और नियामक मंजूरियां

इस पूरे प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के स्वैच्छिक समामेलन दिशा-निर्देशों के तहत विनियामक मंजूरियां लेनी होंगी। सितंबर 2026 में नियामक द्वारा कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी का दर्जा देने से इनकार करने के बाद से ही बोर्ड स्तर पर आईपीओ लाने की प्रक्रिया पर चर्चा तेज हो गई थी। नोएल टाटा इस लिस्टिंग के शुरू from the beginning विरोधी रहे हैं, और यह नया प्लान उसी दिशा में एक बड़ा वैधानिक कदम माना जा रहा है।

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