झारखंड में सड़कों का जाल: 175% की वृद्धि, राष्ट्रीय औसत के करीब पहुंचा राज्य
झारखंड सरकार राज्य में सड़क संसाधनों को बेहतर बनाने के लिए तेजी से काम कर रही है। लक्ष्य है कि जल्द ही झारखंड सड़क संसाधनों के मामले में राष्ट्रीय औसत के करीब पहुंच जाए। सरकार सड़कों के नेटवर्क का विस्तार करने और उनकी गुणवत्ता में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर हो सके और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिले।
सड़कें विकास की प्रगति का पैमाना है और बीते वर्षों में राज्य सड़क संसाधन के मोर्चे पर रफ्तार पकड़ रहा है। राज्य गठन के वक्त यहां कुल सड़क लंबाई महज 5,400 किलोमीटर थी, जो बढ़कर 14,973.63 किलोमीटर से ज्यादा हो चुकी है। यह बढ़ोतरी 175 प्रतिशत से भी अधिक का है। सड़क घनत्व भी 67.75 किमी प्रति 1,000 वर्ग किमी से तीन गुना बढ़कर 187.87 किमी हो गया है।
रांची की सिरमटोली फ्लाईओवर, इनर रिंग रोड के चरणबद्ध निर्माण, जमशेदपुर का स्वर्णरेखा एलिवेटेड कॉरिडोर, धनबाद-बोकारो की चौड़ी सड़कें और दुमका का दिशोम गुरु शिबू सोरेन सेतु (झारखंड का सबसे लंबा 2.34 किमी पुल) राज्य की प्रगति के नए प्रतीक बन गए हैं। 2020 से अब तक 2,240 किमी सड़कों का पुनर्निर्माण और 5,580 किमी से अधिक सड़कों को दो-लेन, इंटरमीडिएट लेन, चार-लेन और छह-लेन तक अपग्रेड किया गया है।
अगले कुछ वर्षों में पांच मेगा प्रोजेक्ट पूरे होने जा रहे हैं। इनमें सिरमटोली से कांटाटोली तक कनेक्टिंग फ्लाईओवर, सहजानंद चौक समेत चार प्रमुख चौक किशोरगंज, गाड़ीखाना, रातू रोड पर फ्लाईओवर, रिंग रोड के बाकी आठ फेज, जमशेदपुर एलिवेटेड कॉरिडोर और 322 नई सड़क योजनाएं शामिल हैं। साहिबगंज-मनिहारी के बीच गंगा नदी पर बन रहा छह किलोमीटर लंबा पुल 2027 तक पूरा हो जाएगा।
पथ निर्माण विभाग का स्पष्ट लक्ष्य है कि अगले कुछ वर्षों में झारखंड का सड़क घनत्व राष्ट्रीय औसत (2023-24 में 199 किमी प्रति 1,000 वर्ग किमी) के बराबर या उससे आगे पहुंच जाए। इसके लिए 38,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं या तो पूरी हो चुकी हैं या पाइपलाइन में हैं।
