उत्तर प्रदेश डेयरी कॉन्क्लेव: 50 साल का सफर, 16% योगदान के साथ देश में पहला स्थान
उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास विभाग ने अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रदेश के सभी 75 जिलों में ‘डेयरी कॉन्क्लेव-2026’ का आयोजन किया। यह आयोजन राज्य के दुग्ध उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करता है। वर्तमान में, भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है, और उत्तर प्रदेश लगभग 38.8 मिलियन मीट्रिक टन वार्षिक उत्पादन के साथ, राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 16% का योगदान देकर प्रथम स्थान पर काबिज है।
यह कॉन्क्लेव दुग्धशाला विकास विभाग और पशुपालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत संचालित विभिन्न योजनाओं से 17,994 लाभार्थियों को लाभ मिला है, वहीं 4,951 प्रारंभिक दुग्ध सहकारी समितियों के गठन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 2.25 लाख रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना, मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना और नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के 2100, 1500 और 450 से अधिक लाभार्थियों को चयन पत्र सौंपे गए।
डेयरी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 28,000 करोड़ रुपये से अधिक के 829 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रतिदिन 39 लाख लीटर दुग्ध प्रसंस्करण और अवशीतन क्षमता में वृद्धि हुई है, जिससे लगभग 10,000 नए रोजगार सृजित हुए हैं। निवेशकों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से लगभग 42 करोड़ रुपये का अनुदान भी प्रदान किया गया है। यह पहल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
