निकाह से पहले युवाओं को मिलेगी मैरिज ट्रेनिंग, जमीयत उलमा ए हिंद की पहल
जमीयत उलमा ए हिंद ने समाज सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए निकाह से पहले युवक-युवतियों के लिए विशेष प्रशिक्षण की शुरुआत की है। इस ‘तरबियत-ए-जौजेन’ (दंपति प्रशिक्षण) का मुख्य उद्देश्य वैवाहिक जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए उन्हें तैयार करना है।
पारिवारिक कलह रोकने पर जोर
जमीयत के मोहकम ए शरिया और इस्लाहे मआशरा इकाई द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण में रिश्तों को निभाने, पारिवारिक कलह को रोकने, परिवार को एकजुट रखने और तलाक जैसी नौबत को सीमित करने के तरीके सिखाए जाएंगे। यह प्रशिक्षण पति-पत्नी के लिए भी खुला है, ताकि वे अपने रिश्तों को और बेहतर बना सकें। जमीयत का मानना है कि परिवारों में बढ़ रही कलह को रोकने के लिए यह एक प्रभावी पहल है।
पंजीकरण और कार्यशाला का विवरण
इस अनूठी पहल के लिए गूगल फॉर्म के माध्यम से पंजीकरण कराए जा रहे हैं, जिसके लिए शुल्क भी निर्धारित है। अब तक बड़ी संख्या में पंजीकरण हो चुके हैं। इस प्रशिक्षण के लिए विशेष साहित्य भी तैयार किया गया है, जिसे वर्कशॉप में वितरित किया जाएगा। पारिवारिक मामलों के विशेषज्ञ इस कार्यशाला में भाग लेंगे। उत्तर प्रदेश के महासचिव मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह कासिमी ने बताया कि यह प्रशिक्षण 08 और 09 अगस्त को आयोजित किया जाएगा।
प्रशिक्षण में क्या होगा शामिल
कार्यशाला में वैवाहिक जीवन के इस्लामी सिद्धांत, प्रभावी आपसी संवाद और विवादों के समाधान के व्यावहारिक तरीके सिखाए जाएंगे। इसका लक्ष्य युवा पीढ़ी को शादी से पहले और बाद की जरूरतों, अधिकारों और भावनात्मक आवश्यकताओं से अवगत कराना है। ‘फैमिली फर्स्ट गाइडेंस, मुंबई’ के संस्थापक मुफ्ती अशफाक क़ाजी विशेषज्ञ के तौर पर मौजूद रहेंगे।
