UP में Private Schools की मनमानी पर शिकंजा, 15 अप्रैल तक चलेगा विशेष अभियान
उत्तर प्रदेश में निजी स्कूलों द्वारा छात्रों पर महंगी और अनधिकृत पाठ्यपुस्तकों को थोपने की बढ़ती शिकायतों के बीच, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने 15 अप्रैल तक प्रदेशव्यापी विशेष निरीक्षण अभियान चलाने की घोषणा की है। इस अभियान के तहत, जिला विद्यालय निरीक्षकों को नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि केवल अधिकृत प्रकाशकों की किताबें ही पढ़ाई जाएं।
अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम करने की पहल
माध्यमिक शिक्षा परिषद के अनुसार, कई निजी स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें जबरन लागू कर रहे हैं, जिनकी कीमतें निर्धारित दरों से 149% से 361% तक अधिक हैं। इससे अभिभावकों और छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि अनधिकृत किताबों का इस्तेमाल करने वाले स्कूलों के प्रबंधक, प्रधानाचार्य या शिक्षकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
परिषद ने पाठ्यपुस्तकों के कॉपीराइट की सुरक्षा को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। पायरेसी या डुप्लीकेसी के मामलों में संबंधित व्यक्तियों और दुकानदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पुलिस और अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा।
बुलंदशहर में किसानों का विरोध प्रदर्शन
इस बीच, बुलंदशहर में भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति ने निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यूनियन ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल, शिक्षा विभाग और बुकसेलरों की मिलीभगत से अभिभावकों को 15 गुना ऊंचे दामों पर किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यूनियन ने शिक्षा के व्यापारीकरण को बर्दाश्त न करने की चेतावनी देते हुए जल्द ही शिक्षा विभाग कार्यालय का घेराव करने का निर्णय लिया है।
परिषद ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे केवल वही पुस्तकें खरीदें जिनके कवर पर 7 अंकों का विशेष सीरियल नंबर अंकित हो। इसके अलावा, छात्रों को उचित दरों पर गुणवत्तापूर्ण किताबें उपलब्ध कराने के लिए सभी विद्यालयों में पुस्तक जागरूकता एवं सुलभता शिविर (पुस्तक मेला) आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
