आगरा: बचपन के सिंघाड़ों का कर्ज चुकाया, भूरी सिंह ने 5 साल की लड़ाई के बाद तालाब को कराया कब्जा मुक्त
आगरा के अंगूठी गांव निवासी 52 वर्षीय भूरी सिंह ने अपने बचपन की यादों को सहेजने के लिए एक लंबी लड़ाई लड़ी। उन्होंने पांच साल तक अथक प्रयास किया कि जिस तालाब से वे बचपन में सिंघाड़े खाकर बड़े हुए, वह फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौट आए। यह तालाब अब अवैध कब्जों और गंदगी का शिकार हो चुका था, जिससे भूरी सिंह का मन द्रवित हो उठता था।
प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्य को समझते हुए, भूरी सिंह ने प्रशासन से गुहार लगाई। जब अधिकारियों ने सुनवाई नहीं की, तो उन्होंने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का दरवाजा खटखटाया। एनजीटी के आदेश के बाद, प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए तालाब से अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया और उसे कब्जा मुक्त कराया।
भूरी सिंह का यह संघर्ष न केवल व्यक्तिगत यादों को बचाने का प्रयास था, बल्कि यह समाज को भी एक संदेश देता है कि हमें अपनी प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब तालाब पर दोबारा कब्जा न हो, इसके लिए प्रशासन को चेतावनी बोर्ड लगवाने और निरंतर निगरानी की व्यवस्था करनी चाहिए। इस पूरी प्रक्रिया ने यह साबित किया कि जनभागीदारी से किसी भी समस्या का समाधान संभव है।
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