Ayodhya Ram Mandir: सम्मान के लिए सूची में नाम, फिर भी निमंत्रण से वंचित रहे अलीगढ़ के रामभक्त
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा 19 मार्च को नव संवत्सर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में उन कारसेवकों को सम्मानित किया जाना था, जिन्होंने 1990 के राम मंदिर आंदोलन के दौरान संघर्ष किया था और जेल गए थे। ट्रस्ट ने ऐसे रामभक्तों की एक सूची भी जारी की थी, जिसमें अलीगढ़ और हाथरस के कई लोगों के नाम शामिल थे। इन रामभक्तों को उम्मीद थी कि उन्हें अयोध्या में भव्य राम मंदिर में सम्मानित किया जाएगा, लेकिन निमंत्रण न मिलने के कारण उन्हें मायूसी हाथ लगी।
1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के दौरान राम का नाम लेना भी एक अपराध माना जाता था। उस समय पुलिस ने कई कारसेवकों को गिरफ्तार किया था और उन्हें ‘रामभक्ति चालान’ नामक प्रमाण पत्र दिया गया था। इस प्रमाण पत्र में धारा 107/116 के तहत गिरफ्तारी, जेल में दाखिल होने और छूटने की तारीख दर्ज थी। ट्रस्ट ने सम्मान के लिए इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर सूची तैयार की थी।
ट्रस्ट की सूची में अलीगढ़ से सुभाष लिटिल, शैलेन्द्र दीप बैंकर, सुनील कुमार, पूनम बजाज, नरेश कुमार, प्रदीप शर्मा, घमण्डी सिंह, विपिन कुमार गर्ग जैसे कई नाम शामिल थे। हाथरस के भी 19 रामभक्तों का नाम सूची में था। इन सभी को निमंत्रण नहीं मिला।
कारसेवकों ने साझा किए अपने अनुभव
अलीगढ़ के कई रामभक्तों ने 1990 के आंदोलन के दौरान के अपने अनुभव साझा किए। समद रोड निवासी अनुराग वार्णेय ने बताया कि जब वे कार सेवा के लिए अयोध्या जा रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इस दौरान उनका एक पैर भी फ्रैक्चर हो गया था। जनकपुरी निवासी मनोज अग्रवाल ने बताया कि उस समय माहौल इतना डरावना था कि घर से बाहर निकलना भी मुश्किल था। पड़ाव दुबे निवासी अर्जुन देव वार्ष्णेय ने बताया कि पुलिस ने डेढ़ सौ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर 13 दिनों तक जेल में रखा था और उन्हें ‘रामभक्ति चालान’ थमा दिया था।
रामभक्त शैलेन्द्र दीप बैंकर ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि उनका नाम ट्रस्ट की सूची में है तो उन्हें बहुत खुशी हुई थी। उन्हें लगा था कि जिस राम मंदिर के लिए उन्होंने संघर्ष किया, अब उसी में उन्हें सम्मान मिलेगा, लेकिन अंतिम समय तक कोई निमंत्रण नहीं मिला।
