UP news: योगी कैबिनेट ने दी ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना’ को मंजूरी, 12,200 गांवों को मिलेगी बस सेवा
उत्तर प्रदेश की योगी कैबिनेट ने ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बढ़ाने के लिए बहुप्रतीक्षित ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026’ को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन गांवों को मुख्यधारा और जिला मुख्यालयों से जोड़ना है, जो आजादी के दशकों बाद भी सार्वजनिक परिवहन सेवा से वंचित थे। सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण जनता को शहरों की तर्ज पर विकास के अवसर मिलें और उनकी आवाजाही सुगम हो सके।
योजना के पहले चरण में उत्तर प्रदेश के 12,200 दूर-दराज के गांवों को सीधी बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार इन रूटों पर विशेष रूप से 28 सीटर छोटी और मझोली बसें चलाएगी। छोटी बसों का चयन इसलिए किया गया है ताकि वे गांवों की संकरी सड़कों और रास्तों पर आसानी से मुड़ सकें और आवाजाही कर सकें। इस योजना से सबसे अधिक लाभ उन छात्रों को होगा जिन्हें पढ़ाई के लिए शहर जाना पड़ता है, साथ ही किसान अपनी उपज और मरीज समय पर अस्पताल पहुंच सकेंगे।
योजना का संचालन और समय सारणी
योजना के तहत बसों का संचालन बहुत ही व्यवस्थित तरीके से किया जाएगा। ये बसें रात के समय संबंधित गांवों में ही रुकेंगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सुबह जल्दी सेवा मिल सके। सुबह 10 बजे से पहले ये बसें गांवों से रवाना होकर जिला मुख्यालय पहुंच जाएंगी। शाम 4 बजे से रात 8 बजे के बीच ये बसें दोबारा शहरों से सवारियां लेकर गांवों के लिए प्रस्थान करेंगी। नियम बनाया गया है कि प्रत्येक चिन्हित गांव में बस का कम से कम दो बार आना-जाना अनिवार्य होगा।
टैक्स में छूट और किराया निर्धारण
इस योजना को व्यवहार्य बनाने के लिए सरकार ने इसे टैक्स और परमिट की बाध्यता से मुक्त रखा है। इन बसों से कोई रोड टैक्स नहीं लिया जाएगा। किराए का निर्धारण पारदर्शी रखने के लिए जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी, जो दूरी और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर किफायती किराया तय करेगी।
एग्रीगेटर कंपनियों के लिए नए नियम
कैबिनेट ने परिवहन क्षेत्र में एक और बड़ा बदलाव करते हुए ओला-उबर जैसी एग्रीगेटर कंपनियों के लिए नए नियम जारी किए हैं। अब इन कंपनियों को परिवहन विभाग में अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। आवेदन शुल्क 25,000 रुपये और लाइसेंस के लिए कंपनी को 5 लाख रुपये देने होंगे। पांच साल में एक बार 5,000 रुपये देकर नवीनीकरण कराना होगा। केंद्र सरकार के नियमों को राज्य में लागू करने के इस फैसले से यात्रियों की सुरक्षा और सेवा की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।
