नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मिला एयरोड्रम लाइसेंस, CM योगी को सौंपा गया दस्तावेज
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार हो गया है। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और उन्हें भारत सरकार द्वारा जारी एयरोड्रम लाइसेंस सौंपा। यह लाइसेंस एयरपोर्ट को वाणिज्यिक उड़ानों के संचालन की अनुमति देता है, जिससे अब उद्घाटन और परिचालन शुरू होने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
अधिकारियों ने बताया कि लाइसेंस मिलने के बाद अब नियामकीय स्वीकृतियों की अंतिम प्रक्रिया चल रही है। एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम इस समय ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) के पास समीक्षा के लिए लंबित है। BCAS से सुरक्षा मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर औपचारिक उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि निर्धारित करेगा।
गौतमबुद्ध नगर के जेवर में बन रहा यह एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड परियोजना है। पहले चरण में, एयरपोर्ट की क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 1.20 करोड़ यात्रियों की होगी। भविष्य में विस्तार के बाद इसकी कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
पहले चरण में टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्गमीटर है, जिसमें 48 चेक इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली और सेल्फ बैगेज ड्रॉप जैसी आधुनिक तकनीकें लागू की जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। एयरपोर्ट को नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है, जिसमें सौर ऊर्जा और वर्षा जल संचयन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
