आगरा के आलू किसानों पर संकट के बादल, लागत निकालना भी हुआ मुश्किल | agra news
आगरा के अन्नदाता इस समय बेहद दौर से गुजर रहे हैं। लागत मूल्य तक निकल पाना मुश्किल हो गया है, जिसके चलते किसानों के चेहरों पर चिंता साफ देखी जा सकती है। खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर भारी भरकम रकम खर्च करने के बाद भी हाथ निराशा ही लग रही है।
प्रशासनिक स्तर पर किसानों को राहत देने के लिए कई बड़े दावे किए गए थे। कुछ समय पहले ही आलू क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया गया था, जिसमें किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने और विदेशों में निर्यात के सपने दिखाए गए थे। हालांकि, हकीकत यह है कि अभी तक एक बोरी आलू भी निर्यात नहीं किया जा सका है और योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह गई हैं।
वर्तमान स्थिति यह है कि कोल्ड स्टोरेजों में लगभग 55 से 60 प्रतिशत आलू अब भी भंडारित पड़ा है। स्थिति यह है कि किसान कोल्ड स्टोरेज का किराया चुकाने में भी असमर्थ हैं। चिप्सोना और हाईब्रिड किस्मों के आलू को बाजार में खरीदार नहीं मिल रहे हैं, जिससे किसानों का आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
इस पूरे संकट का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के परिवार पर पड़ रहा है। समय पर उचित कदम न उठाए जाने के कारण किसानों का कृषि से मोहभंग होने लगा है, जो आने वाले समय में कृषि व्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
