साइबर अपराधों से लड़ने के लिए Digital Policing जरूरी: पीसी मीना
लखनऊ: कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग के महानिदेशक पीसी मीना ने कहा है कि मौजूदा साइबर युग में अपराधों से लड़ने के लिए पारंपरिक पुलिसिंग के तौर-तरीकों से आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अब अपराध से लड़ाई केवल सीमाओं या सड़कों पर नहीं, बल्कि सर्वर रूम और डेटा सेंटरों में तकनीक के माध्यम से लड़ी जा रही है। पीसी मीना ने यह बात उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में आयोजित साप्ताहिक साइबर सिक्योरिटी व डिजिटल फोरेंसिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन के मौके पर कही।
उन्होंने कहा कि वही व्यवस्था मजबूत होगी, जो तकनीक और डेटा की शक्ति को समझकर उसका सही उपयोग करेगी। पीसी मीना ने पुलिस अधिकारियों को डंडे की शक्ति से बाहर निकलकर डेटा आधारित और तकनीक-संचालित Digital Policing को अपनाने की सलाह दी, तभी साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। उन्होंने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को समय की मांग बताया।
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने इस दौरान कहा कि जो अपराध पहले सड़कों पर होते थे, वे अब तेजी से साइबर स्पेस में स्थानांतरित हो चुके हैं। उन्होंने डिजिटल अरेस्ट को ई-लूट (ई-रॉबरी) बताते हुए कहा कि डार्क वेब पर अपराधियों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। डॉ. गोस्वामी ने चेतावनी दी कि आने वाले समय में एजेंटिक अपराधी सामने आ सकते हैं, जो अपना कमीशन तय कर साइबर अपराध करने के लिए तैयार रहेंगे। ऐसी स्थिति में पुलिस बल का साइबर एवं डिजिटल फोरेंसिक मामलों में प्रशिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ गोवा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड एवं जम्मू-कश्मीर से आए कुल 40 पुलिस अधिकारी प्रतिभाग कर रहे हैं।
