बिहार: पश्चिम चंपारण में रामरेखा नदी का पानी हुआ जहरीला, Ramrekha river pollution से जनजीवन प्रभावित
पश्चिम चंपारण के रामनगर से होकर गुजरने वाली रामरेखा नदी का स्वरूप अब पूरी तरह बिगड़ चुका है। नगर सीमा तक पहुंचते-पहुंचते यह नदी एक नाले में तब्दील हो गई है, जिसका पानी छूने से भी लोग कतराते हैं। इस गंभीर Ramrekha river pollution के कारण न केवल जलीय जीवन समाप्त हो गया है, बल्कि स्थानीय निवासियों और किसानों के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती बन गई है।
कभी रतनपुरवा गांव तक साफ रहने वाला नदी का पानी, जैसे ही नगर क्षेत्र में प्रवेश करता है, तेजी से दूषित होने लगता है। रामनगर के नाले सीधे इसमें मिलते हैं और लोग बेधड़क कूड़ा-कचरा तथा घरों से निकलने वाला मैला भी नदी में डाल देते हैं। पुरानी बाजार और धांगड़ टोली मोहल्ले से गुजरने के बाद चौरसिया नगर तक पहुंचते-पहुंचते यह एक नाले का रूप ले लेती है। आगे चलकर हरिनगर चीनी मिल का कचरा भी इसमें बहाया जाता है, जिससे पानी पूरी तरह जहरीला हो चुका है।
इस प्रदूषण का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि नदी का पानी अब किसी भी उपयोग के लायक नहीं रहा। वर्षों पहले पीने के लिए इसका उपयोग बंद हो चुका था, लेकिन अब घरेलू कार्यों, कपड़े-बर्तन धोने, नहाने और यहां तक कि खेतों की सिंचाई के लिए भी यह अनुपयोगी हो गया है। नरकटियागंज और लौरिया क्षेत्र के कई खेतों की सिंचाई का मुख्य साधन रही यह नदी अब फसलों को खराब कर देती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। मवेशी भी अब इस पानी से दूर रहते हैं।
नगर परिषद द्वारा वर्षों से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाने की बात कही जा रही है ताकि नदी का पानी साफ हो सके। इसके लिए दो बार स्थल का चयन भी किया गया, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका। मुख्यमंत्री समग्र योजना के तहत नदी की साफ-सफाई और बेड के निर्माण को लेकर कार्य प्रक्रिया में बताया जा रहा है, लेकिन फिलहाल यह योजना ठंडे बस्ते में है। नदी की यह बदतर होती स्थिति इसके अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा कर रही है और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता पर सवाल उठा रही है।
