बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में ‘रिजल्ट सुधार’ के नाम पर छात्र से ठगी, Bihar university fraud का मामला सामने आया
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में स्नातक के एक छात्र गोल्डन खान से रिजल्ट सुधार के नाम पर 1300 रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। यह घटना विश्वविद्यालय परिसर में सक्रिय बिचौलियों के नेटवर्क को उजागर करती है, जो छात्रों को उनके भविष्य के नाम पर ठग रहे हैं। इस Bihar university fraud ने छात्रों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर उन लोगों की जो पीजी में दाखिले के लिए अपने परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।
मोतिहारी के पीयूपी कॉलेज में स्नातक सत्र 2021-24 के छात्र गोल्डन खान ने टीडीसी पार्ट थर्ड की परीक्षा 2024 में दी थी। वह सभी पेपरों में उत्तीर्ण हो गया था, लेकिन जीएस पेपर में प्रमोट होने के कारण उसका रिजल्ट रुक गया। छात्र को विश्वास था कि उसे जीएस में कम अंक मिले हैं और उसने आरटीआई के तहत उत्तर पुस्तिका की छाया प्रति भी मांगी थी। इसी बीच, एक बिचौलिए ने खुद को विश्वविद्यालय से जुड़ा बताकर छात्र को जल्द रिजल्ट सुधार कराने का झांसा दिया और इसके बदले 1300 रुपये की मांग की। छात्र ने बिचौलिए के खाते में राशि का भुगतान कर दिया।
पैसे देने के बाद जब छात्र ने बिचौलिए से संपर्क करने की कोशिश की, तो उसने फोन उठाना बंद कर दिया और बाद में उसका नंबर बंद आने लगा। परेशान होकर छात्र सोमवार को विश्वविद्यालय पहुंचा और परीक्षा नियंत्रक से मिलकर घटना की शिकायत की। उसने भुगतान की गई राशि का स्क्रीनशॉट और अन्य विवरण परीक्षा नियंत्रक को दिखाए। छात्र ने जल्द से जल्द रिजल्ट सुधारने का अनुरोध किया, क्योंकि 10 जनवरी तक सुधार न होने पर वह पीजी में आवेदन की प्रक्रिया से वंचित हो जाएगा। विश्वविद्यालय की ओर से छात्र को तीन दिनों में परिणाम सुधारने का आश्वासन दिया गया है।
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. राम कुमार ने छात्रों को बिचौलियों के झांसे में न आने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि रिजल्ट से संबंधित किसी भी समस्या के लिए छात्र सीधे उनके कार्यालय में संपर्क करें। वे स्वयं छात्र-छात्राओं से आवेदन लेकर प्राथमिकता के आधार पर उनका निपटारा करते हैं। उन्होंने छात्रों से अपना आवेदन और आवश्यक दस्तावेज सीधे उन्हें जमा कराने को कहा। विश्वविद्यालय में स्नातक से लेकर पीजी तक के रिजल्ट में पेंडिंग की समस्या को दूर करने के नाम पर बिचौलिए सक्रिय हैं, जो खुद को कर्मचारी बताकर छात्रों से पैसे ऐंठते हैं।
