बिहार में ‘हम जिंदा हैं’ साबित करने उमड़ी भीड़, सरकार ने कहा- घबराएं नहीं, Bihar Pension News
बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों को अपना जीवन प्रमाणीकरण (लाइफ सर्टिफिकेट) कराने के लिए इन दिनों भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। राज्यभर के कॉमन सर्विस सेंटरों (CSC) पर वृद्ध, विधवा और दिव्यांग पेंशनधारकों की लंबी कतारें लगी हुई हैं, जो यह साबित करने पहुंचे हैं कि वे अभी जीवित हैं। यह स्थिति अफवाहों और भ्रम के कारण पैदा हुई है, जिससे लोगों में अपनी पेंशन रुकने का डर बैठ गया है।
दरअसल, बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग और कॉमन सर्विस सेंटरों के संयुक्त तत्वावधान में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के ई-लाभार्थियों के लिए जीवन प्रमाणीकरण की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। नियम के अनुसार, सभी पेंशनधारकों को वर्ष में एक बार आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए जीवन प्रमाणीकरण कराना अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लाभार्थी जीवित है और वास्तविक पात्र है।
हालांकि, विभाग ने जीवन प्रमाणीकरण के लिए कोई अंतिम तिथि निर्धारित नहीं की है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में फैली अफवाहों ने पेंशनधारकों में डर पैदा कर दिया। उन्हें लगा कि यदि जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो उनकी पेंशन बंद हो सकती है। इसी डर के कारण गांवों और कस्बों के CSC सेंटरों पर अचानक भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया।
इस स्थिति को देखते हुए बिहार सरकार ने स्पष्टीकरण जारी किया है। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि जीवन प्रमाणीकरण एक सतत प्रक्रिया है और इसके लिए कोई ‘डेडलाइन’ तय नहीं की गई है। सभी लाभार्थी अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय CSC सेंटर पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। सरकार ने यह भी आश्वस्त किया है कि केवल देर होने की वजह से किसी की पेंशन नहीं रोकी जाएगी, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिली है।
विभाग ने CSC संचालकों को विशेष निर्देश दिए हैं कि वे बुजुर्गों, दिव्यांगों और महिलाओं के साथ संवेदनशील व्यवहार करें और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सेवा प्रदान करें। इसके साथ ही, भीड़ को नियंत्रित करने और सही जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की भी तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी अनावश्यक अफरा-तफरी से बचा जा सके।
