बिहार में ठंड के कारण धीमा पड़ा अभियान, Bihar illegal sand mining फिर से सक्रिय
बिहार में कड़ाके की ठंड ने अवैध बालू खनन के खिलाफ चल रहे प्रशासनिक अभियान की रफ्तार को धीमा कर दिया है। इस स्थिति का लाभ उठाकर बालू माफिया एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं, जिससे राज्य में Bihar illegal sand mining का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। राजधानी पटना सहित कई जिलों में गंगा और सोन नदी के किनारे अवैध खनन और परिवहन में वृद्धि देखी जा रही है, जो न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि पर्यावरण और कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती खड़ी कर रहा है।
दिसंबर माह में एक सैप जवान की अवैध बालू माफिया द्वारा कुचलकर हत्या किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने इनके खिलाफ सघन अभियान शुरू किया था। इस अभियान के तहत कई जगहों पर छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध बालू जब्त किया गया था और लाखों रुपये का जुर्माना वसूला गया था। हालांकि, अब ठंड के कारण अभियान में आई सुस्ती ने माफिया को फिर से सक्रिय होने का मौका दे दिया है। पटना की सड़कों पर बालू लादे ट्रैक्टरों की आवाजाही फिर से बढ़ गई है।
जिला प्रशासन ने पहले ही अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर नकेल कसने के लिए ड्रोन, हाईटेक बोट और मजबूत सूचना तंत्र का उपयोग करने के निर्देश दिए थे। साथ ही, संगठित गिरोहों पर अपराध नियंत्रण अधिनियम (सीसीए) के तहत कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। वर्तमान में, कड़ाके की ठंड के कारण घरेलू निर्माण कार्यों में कमी आई है, जिससे बालू की मांग थोड़ी घटी है और प्रति ट्रैक्टर ट्रॉली की कीमत में हजार रुपये तक की कमी देखी गई है। इसका फायदा उठाकर कई व्यापारी भविष्य में दाम बढ़ने की उम्मीद में बालू का भंडारण कर रहे हैं, जिस पर भी प्रशासन नजर रख रहा है। रोहतास जैसे अन्य जिलों में भी प्रशासन चोरी-छिपे हो रहे अवैध खनन पर कार्रवाई करने की बात कह रहा है, लेकिन ठंड के कारण राज्यव्यापी अभियान की गति प्रभावित हुई है।
