UP Election: लखनऊ में वोटर लिस्ट से कटे हजारों नाम, CEO नवदीप रिणवा ने खुद की जांच
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए ‘विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान’ (SIR) चलाया जा रहा है। इसी क्रम में राजधानी लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे जाने की खबर ने निर्वाचन आयोग को चौकन्ना कर दिया। यहां एक ही बूथ पर करीब आधे मतदाताओं के नाम कम हो गए हैं। इसकी समीक्षा करने के लिए खुद यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा मौके पर पहुंचे।
लखनऊ में सबसे ज्यादा नाम कटे
एसआईआर अभियान के तहत पूरे उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा नाम राजधानी लखनऊ में ही काटे गए हैं। इसे लेकर अधिकारी पहले से चिंतित हैं। इस बीच लखनऊ के फैजुल्लागंज क्षेत्र के भाग संख्या 308 में मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस बूथ पर पहले लगभग 1500 पंजीकृत मतदाता थे, लेकिन पुनरीक्षण अभियान के बाद अब इनकी संख्या घटकर मात्र 800 के करीब रह गई है। इतनी बड़ी संख्या में नामों के विलोपन की जानकारी मिलते ही सीईओ नवदीप रिणवा जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने न केवल बूथ रजिस्टर की जांच की, बल्कि राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) और निर्वाचन आयोग के बीएलओ (BLO) से भी बातचीत की।
दोहरे पंजीकरण और पते में बदलाव मुख्य कारण
जांच और बीएलओ से बातचीत के दौरान एक दिलचस्प लेकिन तकनीकी पहलू सामने आया है। अधिकारियों और एजेंटों ने संयुक्त रूप से बताया कि मतदाता सूची से नाम कटने के पीछे कोई प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि मतदाताओं के दोहरे नाम और पते का बदलाव प्रमुख कारण है। फैजुल्लागंज में बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते हैं जो मूल रूप से दूसरे जिलों के निवासी हैं। जब बीएलओ ने उनसे गणना प्रपत्र (Form) भरवाया तो कई लोगों ने डर के मारे उसे वापस नहीं किया। उन्हें डर था कि यदि उन्होंने लखनऊ में नाम पक्का करवाया, तो उनके पैतृक गांव या जिले की वोटर लिस्ट से उनका नाम कट जाएगा। सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में वोटर अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले। इसके चलते नियमों के तहत उनके नाम सूची से हटा दिए गए।
प्रशासन इसे मानता है ‘क्लीन रोल’ की दिशा में कदम
आंकड़ों पर गौर करें तो उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में लखनऊ मतदाता सूची के शुद्धिकरण के मामले में शीर्ष पर बना हुआ है। पूरे प्रदेश में लखनऊ वह जिला है जहां सबसे अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। हालांकि, प्रशासन इसे ‘क्लीन रोल’ की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मान रहा है, ताकि चुनावों में फर्जी वोटिंग की गुंजाइश खत्म हो सके। सीईओ नवदीप रिणवा ने निर्देश दिए हैं कि भले ही नाम काटे गए हों, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी पात्र और वास्तविक मतदाता का नाम गलती से न छूटे। उन्होंने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी अपील की है कि वे मतदाताओं को जागरूक करें ताकि वे समय रहते अपना पंजीकरण और सत्यापन पूर्ण करा सकें।
