ODOC योजना से UP के छोटे व्यापारियों को मिलेगी पहचान, CM योगी ने बैंकों को दिए निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) की सफलता के बाद अब ‘एक जिला-एक व्यंजन’ (ODOC) योजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह पहल छोटे व्यापारियों, पारंपरिक पाक कला से जुड़े कारीगरों और गिग वर्कर्स को नई पहचान देने पर केंद्रित है। सीएम योगी ने बैंकों से इस योजना को प्राथमिकता देने और अधिक से अधिक लोगों को ऋण उपलब्ध कराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग में पूरा सहयोग देगी, लेकिन बैंकों की भूमिका निर्णायक होगी।
सीएम योगी ने बैंकों को निर्देश दिया कि वे किसान, सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम (MSME), स्टार्टअप, महिला स्वयं सहायता समूहों और नवउद्यमी युवाओं को ऋण उपलब्धता सरल, सम्मानजनक और समयबद्ध रखें। उन्होंने कहा कि अनावश्यक दस्तावेज़ों की मांग, बार-बार वेरिफिकेशन और प्रक्रिया में देरी लाभार्थियों को हतोत्साहित करती है। बैंकिंग प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे आम नागरिक को वास्तविक सहूलियत मिले।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के क्रेडिट डिपॉजिट (CD) रेशियो में सुधार पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 तक उत्तर प्रदेश का कुल CD रेशियो 60.39 प्रतिशत हो गया है, जो पिछले लगभग दस वर्षों का सर्वाधिक स्तर है। जनपद-वार समीक्षा के अनुसार, 40 प्रतिशत से कम CD रेशियो वाले जनपदों की संख्या 2018 में 20 थी, जो अब घटकर केवल पाँच रह गई है। उन्होंने मार्च 2026 तक सभी जनपदों के CD रेशियो में लक्षित सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सीएम योगी ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान जैसी योजनाओं की सफलता में बैंकों की सहयोगी भावना को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने उन जनपदों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए जहाँ CD रेशियो 40 प्रतिशत से कम है। उन्होंने बैंकों को गाँवों को लक्षित कर मेगा ऋण मेले आयोजित करने और हर माह जिला स्तरीय बैकर्स कमेटी की बैठक सुनिश्चित करने के लिए भी कहा।
बैठक में बताया गया कि पिछले 08 वर्षों में प्रदेश का बैंकिंग तंत्र अत्यंत मजबूत हुआ है। मार्च 2017 में प्रदेश की कुल जमा राशि 8.92 लाख करोड़ रुपये थी, जो दिसंबर 2025 में बढ़कर 20.44 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इसी अवधि में कुल ऋण वितरण 4.05 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 12.34 लाख करोड़ रुपये पर पहुँच गया। कृषि, MSME और प्राथमिकता क्षेत्रों में ऋण प्रवाह लगातार बेहतर हुआ है।
