UP electricity bill: यूपी में बिजली बिल 10% बढ़ने पर नियामक आयोग ने UPPCL से मांगा जवाब
उत्तर प्रदेश में फरवरी महीने के बिजली बिल में 10 प्रतिशत की अचानक बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। आम आदमी पर पड़ रहे इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ को देखते हुए राज्य विद्युत नियामक आयोग ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) को नोटिस जारी कर इस वृद्धि का आधार स्पष्ट करने को कहा है।
नियामक आयोग ने अपने नोटिस में इस बात पर जोर दिया है कि बिजली बिल में 10 प्रतिशत की वृद्धि का आकलन स्पष्ट नहीं है। आयोग ने सवाल उठाया है कि जब जनवरी महीने में ईंधन खरीद (फ्यूल कॉस्ट) में कोई अतिरिक्त लागत नहीं लगी, तो फरवरी के बिल में यह बढ़ोतरी कैसे हुई। आयोग ने UPPCL से कहा है कि इस बढ़ोतरी के पीछे के कारणों को ठोस तथ्यों और दस्तावेजों के साथ स्पष्ट किया जाए।
आयोग ने UPPCL को निर्देश दिया है कि वह सात दिनों के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करे। आयोग का मानना है कि जनता पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को देखते हुए इस बढ़ोतरी की सही वजह और गणना पद्धति सामने आनी चाहिए। इस बढ़ोतरी के बाद उपभोक्ताओं में नाराजगी भी देखी जा रही है, क्योंकि पहले से ही महंगाई के दौर में बिजली बिल का बढ़ना आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।
नियामक आयोग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह इजाफा सही था या इसमें किसी तरह की त्रुटि हुई त्रुटि थी। UPPCL को अब यह बताना होगा कि फरवरी में बिजली बिल बढ़ाने का आधार क्या था और यह वृद्धि किस नियम या फार्मूले के तहत की गई।
