उत्तर प्रदेश विधानसभा में ‘शायरी वॉर’: शिक्षा नीति पर सपा विधायक और मंत्री में तीखी नोकझोंक | UP Assembly news
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र इन दिनों अपनी तीखी बहसों और दिलचस्प वाकयुद्ध के लिए चर्चा में है। इसी कड़ी में, मंगलवार को सदन की कार्यवाही के दौरान समाजवादी पार्टी की युवा विधायक डॉ. रागिनी सोनकर और योगी सरकार की माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी के बीच जुबानी जंग छिड़ गई। यह बहस प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की कमी से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित थी, जिसने `UP Assembly news` में एक नया मोड़ ला दिया।
सपा विधायक रागिनी सोनकर का सरकार पर हमला
सदन में अपनी बात रखते हुए सपा विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल दागते हुए कहा, “रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा, मेरे नाम से सत्ता पाकर सबको आंख दिखाएगा। धर्मों पर लड़वाएगा और जाति पर बंटवाएगा, गरीबों की शिक्षा को रौंदा जाएगा।” रागिनी ने अपनी इस शायरी के जरिए संदेश दिया कि सरकार धर्म के नाम पर तो राजनीति कर रही है, लेकिन शिक्षा के बुनियादी ढांचे की ओर उसका ध्यान नहीं है। उन्होंने अनुच्छेद 51 (ए) का हवाला देते हुए कहा कि जब स्कूलों में विज्ञान के शिक्षक ही नहीं होंगे, तो बच्चों में वैज्ञानिक सोच कैसे विकसित होगी?
डॉ. सोनकर ने अपनी विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों का उदाहरण पेश करते हुए दावा किया कि मछलीशहर और आसपास के कई राजकीय कॉलेजों में विज्ञान के शिक्षक ही मौजूद नहीं हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि भगवान राम को भी शिक्षा के लिए गुरु वशिष्ठ मिले थे, लेकिन आज की सरकार रामराज की बात तो करती है, पर बच्चों को शिक्षक नहीं दे पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 के बाद से कई कॉलेजों में प्रधानाचार्य और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं, जो अभी तक नहीं भरे गए।
मंत्री गुलाब देवी का शायराना पलटवार
विपक्ष के इन तीखे प्रहारों का जवाब देने के लिए माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी सदन में खड़ी हुईं और उन्होंने भी जवाब के लिए शायरी का ही सहारा लिया। गुलाब देवी ने कहा, “यह बढ़िया है कि आज इन्हें भगवान राम का उदाहरण देना पड़ा। जानकर भी अनजान हैं यह और बात है।” उन्होंने रागिनी पर पलटवार करते हुए आगे कहा, “सूर्य की किरणें कितनी भी चमचमाएं, लेकिन समुद्र की लहरों को सुखा नहीं सकती हैं।” मंत्री ने स्पष्ट किया कि विपक्ष चाहे कितना भी शोर मचा ले, लेकिन सरकार द्वारा किए गए कार्यों की सच्चाई को मिटाया नहीं जा सकता।
गुलाब देवी ने आंकड़ों के जरिए जानकारी दी कि प्रदेश के 974 राजकीय कॉलेजों में से केवल तीन को छोड़कर सभी में विज्ञान वर्ग के शिक्षकों के पद सृजित हैं। उन्होंने अनुदानित कॉलेजों में भी नियुक्तियों की प्रक्रिया और सरकार के विजन को सदन के सामने रखा। इस शायराना नोकझोंक ने सदन का तनाव तो कम किया, लेकिन प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती और शिक्षा की गुणवत्ता का मुद्दा एक बार फिर जनता के बीच चर्चा के केंद्र में आ गया है, जिसका सीधा असर लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ता है।
