RBI ने नहीं घटाई ब्याज दर, होम और कार लोन EMI पर राहत का इंतजार जारी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आम आदमी को सस्ते लोन की सौगात देने से फिलहाल इनकार कर दिया है। RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने अपनी तीन दिवसीय बैठक के बाद रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। इस निर्णय का सीधा असर यह होगा कि होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में कोई कमी नहीं आएगी, और नए लोन भी फिलहाल महंगे ही रहेंगे।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त को इस फैसले की घोषणा करते हुए बताया कि वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और उसके कारण बढ़ी महंगाई के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। यह फैसला उन लोगों के लिए राहत की खबर है जो अपनी बचत पर अच्छा ब्याज चाहते हैं, क्योंकि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाली ब्याज दरें भी फिलहाल कम नहीं होंगी। हालांकि, बैंकों द्वारा अपनी लागत और बाजार की स्थितियों के अनुसार ब्याज दरों में थोड़ा बदलाव किया जा सकता है।
रेपो रेट और EMI पर असर
रेपो रेट वह दर है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण प्रदान करता है। इसी दर के आधार पर बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन की ब्याज दरें तय करते हैं। यदि रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए फंड की लागत बढ़ जाती है, जिससे वे होम, कार और पर्सनल लोन पर अधिक ब्याज वसूलते हैं, और फलस्वरूप EMI बढ़ जाती है। इसके विपरीत, रेपो रेट में कमी से लोन सस्ते होते हैं और EMI घट जाती है।
महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता का प्रभाव
RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का कारण वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता को बताया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत के आयात बिल और माल ढुलाई की लागत पर पड़ता है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका की व्यापार नीतियां और अन्य देशों में आर्थिक सुस्ती भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं। RBI का मानना है कि इन बाहरी कारकों का असर भारत की महंगाई दर पर भी पड़ सकता है। यदि ऐसे समय में रेपो रेट घटाया जाता, तो बाजार में अतिरिक्त तरलता (पैसा) आ जाती, जिससे महंगाई और बढ़ सकती थी। इसलिए, जब तक महंगाई नियंत्रण में आने का स्पष्ट संकेत नहीं मिलता, RBI ब्याज दरों में कटौती करने से कतराएगा।
