यूपी में अब दुर्घटना और सामान्य बीमारी में भी मिलेगी `UP MLA fund` से मदद, योगी सरकार का बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश के गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अब विधायक निधि (MLALAD) के नियमों में ऐतिहासिक संशोधन की तैयारी चल रही है। जल्द ही प्रदेश के विधायक अपनी निधि का उपयोग न केवल असाध्य रोगों के लिए, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं और सामान्य बीमारियों के इलाज में भी आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए कर सकेंगे। यह कदम लाखों लोगों को गंभीर स्वास्थ्य संकटों से उबरने में मदद करेगा।
इस महत्वपूर्ण बदलाव की पहल कुंडा विधानसभा सीट से विधायक रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’ ने की थी। विधानसभा सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा करते हुए उन्होंने विधायक निधि के मौजूदा नियमों की विसंगतियों को प्रमुखता से उठाया। राजा भैया ने तर्क दिया था कि वर्तमान नियमावली के तहत केवल कैंसर या किडनी फेलियर जैसे ‘असाध्य रोगों’ के लिए ही आर्थिक सहायता का प्रावधान है।
उन्होंने सदन का ध्यान इस ओर खींचा कि सड़क दुर्घटनाएं या कई अन्य गंभीर बीमारियां तकनीकी रूप से असाध्य रोगों की श्रेणी में नहीं आतीं, लेकिन उनका इलाज इतना महंगा होता है कि गरीब व्यक्ति उसे वहन नहीं कर पाता। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ‘असाध्य’ शब्द की बाध्यता समाप्त कर दी जाए, तो विधायक अपने क्षेत्र के अधिक से अधिक जरूरतमंदों की जान बचा सकेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस सुझाव की सराहना करते हुए सदन में ही आश्वस्त किया था कि सरकार जनहित में इन नियमों को शिथिल करने पर विचार करेगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, ग्राम्य विकास विभाग विधायक निधि के वर्तमान दिशा-निर्देशों का गहनता से परीक्षण कर रहा है। विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होते ही विभाग इस संबंध में उच्च स्तरीय बैठकें करेगा, जिसके बाद नए संशोधित शासनादेश जारी किए जाएंगे। इसमें सहायता राशि की सीमा और पात्रता के मानकों को भी पुनर्परिभाषित किया जा सकता है।
विधायक निधि के उपयोग में एक और बड़ी अड़चन ‘एक बार सहायता’ का प्रावधान है। वर्तमान में एक मरीज को पूरी बीमारी के दौरान केवल एक बार ही आर्थिक मदद दी जा सकती है। कई विधायकों का मानना है कि चूंकि इलाज लंबा चलता है, इसलिए एक बार की सीमित मदद मरीज के लिए नाकाफी साबित होती है। चर्चा है कि नई नियमावली में इस अड़चन को भी दूर किया जा सकता है, ताकि गंभीर मरीजों को किस्तों में या आवश्यकतानुसार दोबारा मदद मिल सके। इस संशोधन से ग्रामीण क्षेत्रों के उन मरीजों को सबसे ज्यादा लाभ होगा, जो अचानक आई चिकित्सीय आपदा के कारण कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं। यह फैसला `UP MLA fund` के स्वरूप को और अधिक कल्याणकारी बनाएगा।
