Lucknow news: मनकामेश्वर मंदिर में प्राचीन कुएं का जीर्णोद्धार, मंडलायुक्त ने बताया ‘सांस्कृतिक धरोहर’
लखनऊ के ऐतिहासिक मनकामेश्वर मंदिर में सदियों पुरानी परंपरा को पुनर्जीवित किया गया है। मंदिर परिसर में स्थित एक प्राचीन कुएं के जीर्णोद्धार के बाद बुधवार को विधिवत पूजन समारोह आयोजित हुआ। मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने महंत योगेश पुरी के मार्गदर्शन में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कुएं का पूजन किया। इस दौरान रामेश्वरम से लाए गए 22 पवित्र कुओं के जल को कुएं में प्रवाहित किया गया, जिससे यह कुआं एक बार फिर आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बन गया।
मंदिर मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि यह प्रेरणा रामायण सर्किट की यात्रा से मिली। अयोध्या से जनकपुर की यात्रा के दौरान उन्होंने नंदीग्राम में देखा कि वनवास के दौरान भरत ने जहां से राजकाज चलाया था, वहां 27 तीर्थों का जल डालकर श्रीराम का राज्याभिषेक किया गया था। इसी दिव्य परंपरा से प्रेरित होकर मनकामेश्वर मंदिर के बंद पड़े कुएं का जीर्णोद्धार कर प्राचीन विधि से बाबा का अभिषेक करने का संकल्प लिया गया।
मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्राचीन कुएं हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर हैं। यह प्रयास केवल जीर्णोद्धार नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत को संजोने का कार्य है। उन्होंने कहा कि यह पहल जल संरक्षण और धार्मिक परंपराओं दोनों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
महंत योगेश पुरी ने बताया कि यह कुआं कभी मीठे जल का स्रोत होने के साथ-साथ पूजन और संस्कारों का प्रमुख केंद्र था। विवाह जैसे मांगलिक अवसरों पर कुआं पूजन की परंपरा निभाई जाती थी, जो समय के साथ बोरिंग तक सीमित हो गई। अब शहर के मध्य इस प्राचीन कुएं का पुनः संचालन शुरू होने से यह विधि फिर से जीवित होगी।
