कानपुर किडनी रैकेट: ऑपरेशन करने वाली टीम में नहीं था कोई सर्जन, ‘डॉक्टर’ अली निकला OT मैनेजर
उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए किडनी रैकेट मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस जांच में पता चला है कि पिछले शनिवार को केशवनगर के आहूजा अस्पताल में आयुष की किडनी निकालकर पारुल को लगाने वाली आठ लोगों की टीम में एक भी प्रशिक्षित सर्जन नहीं था। ये सभी झोलाछाप थे। जिस व्यक्ति को मुख्य डॉक्टर बताया जा रहा था, वह भी ओटी मैनेजर निकला। उसका पूरा नाम मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ डॉक्टर अली है और वह दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला है।
पुलिस की एक टीम ने मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली के उत्तम नगर, दिल्ली स्थित फ्लैट पर छापा मारा। हालांकि, अली मोबाइल बंद कर फरार हो गया। उसकी पत्नी आशिमा सिद्दीकी ने पुलिस को बताया कि अली कुछ माह पूर्व दिल्ली के आकाश अस्पताल में ओटी मैनेजर था और काफी समय से खाली चल रहा था। उसने इस बात की पुष्टि की कि अली डॉक्टर नहीं है।
पुलिस ने इस मामले में गुरुवार को गिरफ्तार किए गए गाजियाबाद के ओटी मैनेजर राजेश कुमार और ओटी असिस्टेंट कुलदीप सिंह राघव को जेल भेज दिया गया है। डीसीपी के मुताबिक, दोनों ने पूछताछ में बताया कि अली ही किडनी निकालता और लगाता था। इससे पहले जितने भी ऑपरेशन हुए, सभी अली ने किए। 28 मार्च की रात केशवपुरम के आहूजा अस्पताल में ऑपरेशन के बाद अली, राजेश कुमार और कुलदीप तीनों एक कार से गाजियाबाद गए थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि ये लोग ऑपरेशन से पहले दो डोनर को बुलाते थे। दोनों को मेडिकल फिटनेस मिलने के बाद ही बेहतर रिपोर्ट वाले व्यक्ति की किडनी निकाली जाती थी, जबकि एक डोनर को रिजर्व रखा जाता था। ओटी टेक्नीशियन ने बताया कि मार्च में उन्होंने एक दक्षिण अफ्रीकी महिला का ऑपरेशन किया था, जिसके एवज में डेढ़ करोड़ रुपये वसूले गए थे। पुलिस अब इस पूरे रैकेट के अन्य सदस्यों और सरगना की तलाश कर रही है।
