गुटखा विज्ञापन मामले में हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, कई सितारे बने पक्षकार | Gutkha Ad
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गुटखा कंपनियों के प्रचार से जुड़े एक मामले में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण से जवाब मांगा है। न्यायालय ने अपने पूर्व के आदेश के अनुपालन की स्थिति पर स्पष्टीकरण तलब किया है। इस मामले में कई प्रमुख क्रिकेटरों और फिल्मी अभिनेताओं को भी विपक्षी पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट ने 2023 में याची द्वारा दिए गए प्रत्यावेदन पर अब तक जांच लंबित रहने पर सवाल उठाए हैं। यह मुद्दा सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ता अधिकारों को प्रभावित करता है।
यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका में संबंधित गुटखा कंपनियों के साथ-साथ क्रिकेटर कपिल देव, सुनील गावस्कर, वीरेंद्र सहवाग, क्रिस गेल तथा अभिनेताओं अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, अक्षय कुमार, अजय देवगन, सलमान खान, रितिक रोशन, टाइगर श्रॉफ, सैफ अली खान व रणवीर सिंह को भी विपक्षी पक्षकार बनाया गया है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि उक्त हस्तियां जो पान मसाला कंपनियों का प्रचार कर रही हैं, उनमें से अधिकांश पद्म पुरस्कार धारक हैं और उनके द्वारा किए जाने वाले ऐसे विज्ञापनों से समाज में गलत संदेश जाता है, साथ ऐसे विज्ञापन उपभोक्ता कानूनों का उल्लंघन भी हैं। सार्वजनिक हस्तियों द्वारा ऐसे विज्ञापन उनकी सामाजिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल उठाते हैं।
उधर, सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क तथा पान मसाला पर स्वास्थ्य उपकर 1 फरवरी से लागू हो गया है। यह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की उच्चतम 40 प्रतिशत की दर के ऊपर लगाया गया। ये उपकर और उत्पाद शुल्क इन हानिकारक वस्तुओं पर 1 जुलाई 2017 से लागू 28 प्रतिशत जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर का स्थान लेंगे।
इसके अलावा, 1 फरवरी से तंबाकू उत्पादों (चबाने वाला तंबाकू, फिल्टर खैनी, जर्दा युक्त सुगंधित तंबाकू और गुटखा) के लिए अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) आधारित मूल्यांकन की नई व्यवस्था शुरू हो गई है। इसके तहत जीएसटी का निर्धारण पैकेट पर घोषित खुदरा बिक्री मूल्य के आधार पर किया जाएगा।
पान मसाला निर्माताओं को 1 फरवरी से स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून के तहत नया पंजीकरण कराना होगा। ऐसे उत्पादों के निर्माताओं को सभी पैकिंग मशीनों को कवर करने वाली एक कार्यशील सीसीटीवी प्रणाली लगानी होगी और इसकी फुटेज को कम से कम 24 महीनों तक सुरक्षित रखना होगा। उन्हें उत्पाद शुल्क अधिकारियों को मशीनों की संख्या और उनकी क्षमता की जानकारी भी देनी होगी। यदि कोई मशीन लगातार कम से कम 15 दिनों तक बंद रहती है, तो वे उत्पाद शुल्क में छूट का दावा कर सकते हैं।
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