अलीगढ़ में आरटीआई कानून की लचर व्यवस्था, सूचना आयुक्त ने जताई चिंता: RTI act
अलीगढ़ नगर निगम में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के क्रियान्वयन की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई है। राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने अपने निरीक्षण के दौरान पाया कि जन सूचना अधिकारियों को आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों की पर्याप्त जानकारी नहीं है। कई अधिकारी शिकायत और द्वितीय अपील के बीच का अंतर तक नहीं समझते, जिसके कारण आवेदकों को समय पर सूचनाएं नहीं मिल पा रही हैं और अपीलों की संख्या बढ़ रही है।
निरीक्षण के दौरान जन सूचना अधिकारी के कार्यालय में न तो कोई सूचना पट्ट मिला और न ही व्यवस्था दुरुस्त दिखी। प्रथम अपीलीय अधिकारी को यह भी जानकारी नहीं थी कि आवेदकों ने कौन सी सूचनाएं मांगी थीं और उनके जवाब क्या दिए गए। लंबित मामलों और पूर्व में दिए गए निर्देशों का रिकॉर्ड भी अधिकारियों की जानकारी से बाहर था। एक मामले में, 24 मार्च 2024 को दायर प्रथम अपील पर प्रथम अपीलीय अधिकारी को यह तक पता नहीं था कि उन्होंने क्या निर्देश दिए थे।
सूचना आयुक्त ने बताया कि लखनऊ में डेटाबेस की जांच में करीब 70 प्रतिशत मामलों में अपील किए जाने की बात सामने आई है, जो व्यवस्था की खामियों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि लगभग 90 प्रतिशत मामलों में आवेदक को न तो प्रभावी ढंग से सुना गया और न ही समय से सूचना उपलब्ध कराने की पहल की गई। अलीगढ़ जिले की स्थिति सबसे खराब बताई गई, जहां 314 जन सूचना अधिकारियों पर अधूरी या गलत सूचना देने का दोषी पाए जाने पर जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा, 264 अपीलें आयोग में लंबित हैं। इस लापरवाही के संबंध में मुख्य सचिव को पत्र लिखा जाएगा।
सूचना आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि आरटीआई अधिनियम के तहत वित्तपोषित निजी संस्थाएं भी आती हैं। यदि कोई निजी संस्थान सरकारी विभाग से वित्तपोषित है, तो उससे संबंधित जानकारी सरकारी विभाग से आरटीआई के तहत मांगी जा सकती है।
उन्होंने जन सूचना अधिकारियों को आरटीआई अधिनियम और उसकी प्रक्रिया की जानकारी के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया और प्रशासनिक अधिकारियों से प्रशिक्षण की व्यवस्था कराने का आग्रह किया। साथ ही, अधिकारियों की मासिक बैठकों में आरटीआई को एक अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने का सुझाव दिया ताकि प्रावधानों और जिम्मेदारियों की जानकारी बनी रहे।
