लखनऊ कोर्ट में फर्जीवाड़ा: पुरानी तारीख में समझौता तैयार कर गुमराह करने का मामला, FIR दर्ज
लखनऊ की एक अदालत में एक वकील द्वारा धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि वर्ष 2009 के स्टाम्प पेपर पर पुरानी तारीख में एक पारिवारिक समझौता (हिबा) तैयार कर उसे वर्ष 2015 में विचाराधीन एक वाद में पेश किया गया, जिससे न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया गया। इस फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद, एडीएम वित्त एवं राजस्व के आदेश पर कैसरबाग पुलिस ने स्टाम्प विक्रेता, पिता-पुत्र और गवाह सहित पांच लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज की है।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब वकील शशांक शुक्ला ने बताया कि उनके द्वारा दायर एक वाद में प्रस्तुत किया गया 20 फरवरी 2013 का पारिवारिक समझौता संदिग्ध था। आरोप है कि यह दस्तावेज वर्ष 2009 के 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर निष्पादित दिखाया गया था, जबकि वाद 2015 में दायर किया गया था और उस समय इस दस्तावेज का कोई उल्लेख नहीं था।
पीड़ित पक्ष ने मार्च 2023 में आरटीआई के माध्यम से डीएम कार्यालय से जानकारी मांगी थी। जवाब में बताया गया कि संबंधित स्टाम्प विक्रेता, डीके रस्तोगी, ने अपना बिक्री रजिस्टर कार्यालय में जमा नहीं किया था। इसके बाद, पीड़ित ने स्टाम्प विक्रेता डीके रस्तोगी, मो. इरफान, मो. एहसान, मो. अजीम और सौभाग्य यादव पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। इस घटना से न्याय प्रक्रिया की अखंडता पर सवाल उठता है और यह आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है कि कैसे न्यायालयों को ऐसे फर्जी दस्तावेजों से गुमराह किया जा सकता है।
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