अमेरिका में आईटी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई से भारतीयों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया अटकी | usa news
अमेरिका में कार्यरत लाखों भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए एक बड़ी चुनौती सामने आई है। अमेरिकी प्रशासन ने देश की दिग्गज तकनीकी कंपनियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम यानी PERM से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के दायरे में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल, कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी के अलावा माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। अमेरिकी श्रम विभाग के इस कदम से इन कंपनियों के जरिए आगे बढ़ रही ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पर अचानक ब्रेक लग गया है।
इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई का मुख्य कारण स्थानीय अमेरिकी नागरिकों के रोजगार की रक्षा करना बताया जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि कुछ तकनीकी कंपनियां वीजा प्रणाली का दुरुपयोग कर रही हैं और योग्य स्थानीय लोगों के बजाय विदेशी पेशेवरों को प्राथमिकता दे रही हैं। इस नीतिगत बदलाव के तहत अब इन कंपनियों से जुड़ी सभी नई PERM अर्जियों को स्वीकार करने से मना कर दिया गया है, साथ ही जो आवेदन पहले से ही पेंडिंग पड़े थे, उनकी प्रक्रिया भी अनिश्चितकाल के लिए रोक दी गई है।
हालांकि इस फैसले से H-1B वीजाधारकों की मौजूदा नौकरियों पर तत्काल कोई संकट नहीं आया है, क्योंकि H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड की प्रक्रियाएं अलग-अलग होती हैं। लेकिन जिन भारतीय कर्मचारियों का ग्रीन कार्ड आवेदन अभी शुरुआती चरणों में था या फाइल होना बाकी था, उन्हें भारी मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। प्रक्रिया लंबी खींचने से पेशेवरों को अपने परिवार और करियर की लंबी अवधि की योजनाएं बदलने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के सख्त प्रशासनिक कदमों से आने वाले समय में भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका में स्थायी निवास की राह बेहद कठिन हो जाएगी। प्रभावित कंपनियों द्वारा कानूनी विकल्प तलाशने की संभावना है, लेकिन तब तक हजारों कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटका रहेगा।
