दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सख्ती, नियम तोड़ने वाली एजेंसियों को नोटिस जारी | delhi pollution news
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दियों के मौसम से ठीक पहले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में सरकार ने अपनी कार्यवाई तेज कर दी है। निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने सरकारी और निजी दोनों तरह की परियोजनाओं का औचक निरीक्षण शुरू किया है। इस कार्रवाई के दौरान कई प्रमुख परियोजनाओं में धूल नियंत्रण के तय नियमों की अनदेखी पाई गई, जिसके बाद संबंधित एजेंसियों को कड़े नोटिस जारी किए गए हैं।
निरीक्षण के दौरान कहां मिली खामियां?
जांच दल ने पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र में चल रहे सीवर लाइन कार्यों के साथ-साथ नेशनल हाईवे-9 और रोहतक रोड पर चल रहे मेट्रो विस्तार कार्यों का जायजा लिया। इसके अलावा, केंद्रीय सचिवालय, सेंट्रल विस्टा, सरोजिनी नगर और नेताजी नगर में चल रहे बड़े निर्माण कार्यों की भी जांच की गई। इन तमाम जगहों पर निर्माण सामग्री को खुले में छोड़ने और पानी का नियमित छिड़काव न करने जैसी गंभीर कमियां पाई गईं। नियमों का उल्लंघन करने वाली इन एजेंसियों पर अब वित्तीय जुर्माना लगाने से लेकर काम रोकने तक की सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
प्रदूषण के स्रोतों पर पहले से प्रहार
प्रशासन का रुख साफ है कि विकास कार्यों की आड़ में पर्यावरण से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सर्दियों में स्मोक की समस्या से निपटने के लिए केवल प्रतिक्रियात्मक कदम उठाने के बजाय प्रदूषण के मूल स्रोतों को पहले ही नियंत्रित किया जा रहा है। इसके तहत एक अक्टूबर से ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ अभियान भी प्रभावी रूप से लागू किया गया है, ताकि वाहनों से निकलने वाले धुएं पर लगाम लगाई जा सके।
तकनीक का सहारा और आगे की रणनीति
प्रदूषण के स्तर पर चौबीसों घंटे नजर रखने के लिए एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की मदद ली जा रही है। सड़कों की धूल, औद्योगिक कचरा और मलबे के प्रबंधन के लिए संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इस पूरी मुहिम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि शहर में बुनियादी ढांचे का विकास भी होता रहे और आम जनता को सांस लेने योग्य स्वच्छ हवा भी मिल सके।
