कानपुर में उठी मांग: RTE का दायरा 12वीं तक बढ़े, स्कूलों की मैपिंग की हो जांच
कानपुर में घरेलू महिला कामगार यूनियन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मैग्सेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडेय ने शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की कि RTE का दायरा मौजूदा कक्षा 8 से बढ़ाकर कक्षा 12 तक किया जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों की शिक्षा 8वीं के बाद बाधित न हो।
पांडेय ने कहा कि कानपुर में कई स्कूल RTE के तहत मैपिंग में गड़बड़ी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्कूलों में कई सेक्शन चलते हैं, लेकिन मैपिंग केवल एक सेक्शन की कराई गई है। इसके अलावा, कई स्कूल कागजों पर बंद दिखाए जा रहे हैं, जबकि वे वास्तव में संचालित हो रहे हैं। उन्होंने इन सभी मामलों की गहन जांच की मांग की।
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी RTE कानून में खामियों को उजागर किया। कामगार यूनियन की महामंत्री मीनू सूर ने कहा कि कानून में संशोधन कर इसे 12वीं तक ले जाने की जरूरत है। आशा ट्रस्ट के सदस्य दीनदयाल सिंह ने कहा कि सिर्फ शिक्षा का अधिकार ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का अधिकार, काम का अधिकार और सस्ता व सुलभ न्याय भी मौलिक अधिकार होना चाहिए।
इस दौरान संदीप पांडेय ने यह भी याद दिलाया कि अदालत ने सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य करने का आदेश दिया था, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यदि स्कूल बंद हो तो RTE के बच्चों को शिफ्ट करने का प्रावधान होना चाहिए, जो वर्तमान में नहीं है। कार्यक्रम में मेधावी बच्चों को सम्मानित भी किया गया।
