बिहार में जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) के मुआवजे में देरी, परियोजनाओं पर असर; प्रधान सचिव ने मांगी रिपोर्ट
बिहार में विकास परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद भी मुआवजे के भुगतान में देरी एक बड़ी बाधा बन गई है। इस समस्या के कारण कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सभी जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
प्रधान सचिव ने समीक्षा बैठक में पाया कि कई जिलों में जमीन अधिग्रहण तो हो जाता है, लेकिन संबंधित विभाग द्वारा समय पर मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं किया जाता है। उन्होंने जिलों से यह जानकारी मांगी है कि जमीन अधिग्रहण के लिए कितनी राशि की आवश्यकता है, संबंधित विभागों द्वारा कितनी राशि दी गई है और वर्तमान में कितनी राशि बकाया है।
समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ जिलों में जमीन अधिग्रहण मद में राशि पड़ी हुई है, लेकिन उसका उपयोग नहीं हो रहा है। प्रधान सचिव ने निर्देश दिया कि यदि राशि खर्च करने की आवश्यकता नहीं है, तो उसे तुरंत संबंधित विभाग को वापस लौटाया जाए। उन्होंने 20 जिलों में उद्योग विभाग की भू-अर्जन कार्रवाई को तेज करने के निर्देश भी दिए हैं।
प्रधान सचिव ने लैंड बैंक के लिए जमीन अधिग्रहण को प्राथमिकता सूची में रखने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि हर जिले में जमीन अधिग्रहण से संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए नियमित बैठकें हों। इसके लिए मंगलवार का दिन निर्धारित किया गया है, जिसमें राजस्व विभाग के साथ-साथ जमीन अधिग्रहण कराने वाले विभागों के अधिकारी भी शामिल होंगे। मुआवजे के भुगतान से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई के लिए शुक्रवार और शनिवार का दिन तय किया गया है।
