बिहार में MGNREGA fraud रोकने के लिए बड़ा कदम, अब ई-केवाईसी के बाद ही दर्ज होगी हाजिरी
मनरेगा (MGNREGA) योजना में फर्जी उपस्थिति दर्ज कर मजदूरी हड़पने के मामलों पर लगाम लगाने के लिए बिहार सरकार ने ई-केवाईसी को अनिवार्य कर दिया है। यह कदम फर्जी फोटो अपलोड कर भुगतान लेने की पुरानी समस्या को खत्म करने के लिए उठाया गया है। नई व्यवस्था के तहत, अब श्रमिकों की उपस्थिति केवल ई-केवाईसी पूरी होने के बाद ही ऐप के माध्यम से दर्ज की जा सकेगी।
नई तकनीक के तहत, यदि किसी श्रमिक की फोटो दोबारा या किसी दूसरे कार्यस्थल से अपलोड की गई तो ऐप उसे स्वतः खारिज कर देगा। इससे फर्जी उपस्थिति के आधार पर मजदूरी भुगतान की गड़बड़ी पर प्रभावी रोक लगेगी। ई-केवाईसी के बाद कार्यस्थल पर ली गई फोटो का मिलान सीधे आधार में दर्ज फोटो से होगा। ऐप यह भी जांचेगा कि फोटो सही कार्यस्थल से ही अपलोड की गई है या नहीं।
इस मामले में सुपौल जिले की स्थिति काफी बेहतर है। जिले में आधार से लिंक कुल 803698 सक्रिय मनरेगा जॉब कार्डधारक हैं, जिनमें अब तक 428109 श्रमिकों की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो कुल जॉब कार्डधारी मजदूरों में से 53.27 फीसद मजदूर का ई-केवाईसी कर लिया गया है, जो राज्य में दूसरे स्थान पर है। पहले स्थान पर बक्सर है जहां अबतक 56.9 फीसद का ई-केवाईसी पूरा कर लिया गया है।
जी-रामजी डीपीओ कृष्णा कुमार ने बताया कि ऐप में ऐसी तकनीक जोड़ी गई है, जिससे श्रमिक की पहचान आंख की रेटिना के माध्यम से की जा सकेगी। यदि मिलान में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो फोटो को ऐप स्वीकार नहीं करेगा। इससे कार्यस्थल से दूर बैठकर फोटो अपलोड करना संभव नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि सभी श्रमिकों की ई-केवाईसी पूरी होने के बाद मजदूरी भुगतान में होने वाली अनियमितताओं पर पूरी तरह अंकुश लगेगा।
