कानपुर किडनी रैकेट में दो मरीजों की मौत की पुष्टि, फरार आरोपियों की तलाश जारी; Kanpur kidney racket
कानपुर में हुए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जांच में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने पुष्टि की है कि इस रैकेट के तहत हुए सात ट्रांसप्लांट में से दो मरीजों की मौत हो चुकी है। इन अवैध ऑपरेशनों को झोलाछाप डॉक्टरों की टीम अंजाम देती थी। पुलिस को जानकारी मिली है कि एक महिला मरीज की मौत मेडलाइफ अस्पताल से घर भेजे जाने के बाद हुई, जबकि दूसरा मृतक नेपाल का एक युवक था। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि मामले की जांच जारी है और दोनों मृतकों की पहचान की जा रही है।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस रैकेट के तार केवल कानपुर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा से होते हुए अब दिल्ली के कई नामी अस्पतालों तक पहुंच गए हैं। इस रैकेट के मुख्य आरोपी डॉ. अफजल और मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली अभी भी फरार हैं। पुलिस की एक टीम आरोपियों की तलाश में दिल्ली गई थी, लेकिन बिना किसी सफलता के वापस लौट आई। सूत्रों के अनुसार, रैकेट के दिल्ली के बड़े अस्पतालों से जुड़े होने के कारण कमिश्नरेट पुलिस पर भी दबाव है, जिससे कार्रवाई धीमी पड़ गई है।
इस मामले में पहले ही कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। किडनी कांड के मास्टरमाइंड रोहित तिवारी के साथ आहूजा अस्पताल की संचालक डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति सुरजीत सिंह आहूजा, एजेंट शिवम अग्रवाल, मेडलाइफ अस्पताल के मालिक राजेश कुमार व राम प्रकाश कुशवाहा, प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह और गाजियाबाद के एक अस्पताल के ओटी मैनेजर राजेश कुमार सहित कई लोगों को जेल भेजा जा चुका है। पुलिस अब फरार चल रहे आरोपियों की तलाश में उनके परिचितों और रिश्तेदारों के ठिकानों पर दबिश दे रही है।
