मां के गहने बेचकर खरीदी किट, पिता का अधूरा सपना: CSK के ‘हीरे’ कार्तिक शर्मा की संघर्ष गाथा
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की नीलामी में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने आगरा के युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज कार्तिक शर्मा को 14.20 करोड़ की बोली लगाकर टीम में शामिल किया है। यह बोली सिर्फ एक खिलाड़ी के लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार की तपस्या और त्याग की कहानी है, जिसने हर अभाव को अपनी ताकत में बदल कर इस सपने को सच कर दिखाया।
कार्तिक शर्मा की सफलता के पीछे उनकी मां के मौन बलिदान और पिता के अधूरे सपने का असाधारण योगदान छिपा है। जब उनके नाम के लिए नीलामी 14.20 करोड़ तक पहुंची, तो कार्तिक ने बताया कि यह पल उनके लिए सपने जैसा नहीं, बल्कि संघर्ष की पूरी फिल्म था। आंखों के सामने मां की टूटी चूड़ियां, बाबा की पेंशन की पासबुक और पापा की मेहनत तैर रही थी। उन्हें लगा, आज मेरा नहीं, मेरे पूरे परिवार का चयन हुआ है।
कार्तिक के पिता 28 साल की उम्र में चोट के कारण क्रिकेट से बाहर हो गए थे। उस दिन उन्होंने तय किया था कि अब उनका सपना कार्तिक जिएगा। उन्होंने खुद को पीछे कर दिया और कार्तिक की जिंदगी को आगे कर दिया। कार्तिक आज भी मैदान में उतरते वक्त यही सोचते हैं कि पापा का अधूरा सपना उनके हाथों से पूरा हो रहा है।
संघर्ष के दिनों में एक बार लोगों ने जलन में उनकी गेंद फेंकने वाली मशीन चुरा ली और नेट जला दिया। उस रात पिता पहली बार चुप थे लेकिन सुबह बोले कि अब रुकेंगे नहीं। उसी दिन कार्तिक ने समझ लिया कि क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, जिम्मेदारी है।
मां के त्याग को याद करते हुए कार्तिक बताते हैं कि जब अंडर-14 में चयन हुआ और किट के पैसे नहीं थे, तो मां ने अपने गहने उतार दिए। एक लाख से ज्यादा की किट सिर्फ मां के विश्वास से आई। उनकी हर पारी मां के मौन बलिदान की कहानी है। बाबा की पेंशन से घर चलता था और पापा ने पढ़ाना छोड़ दिया ताकि कार्तिक की ट्रेनिंग न रुके। यह एक खिलाड़ी की नहीं, पूरे परिवार की सफलता है।
