आगरा में सदियों पुरानी चौहान वंश की परंपरा, क्वार की नवमी पर गद्दी पर बैठते हैं राजा | agra news
आगरा जिले के खंदौली क्षेत्र में इतिहास के पन्ने आज भी जीवंत हैं। यहाँ के बमान गांव में चौहान वंश की सदियों पुरानी परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जा रहा है, जो आधुनिक दौर में भी ग्रामीण संस्कृति और प्राचीन धरोहर का अनूठा उदाहरण है।
इतिहास और परंपरा के इस अनूठे संगम के तहत, हर साल शारदीय नवरात्रि की नवमी पर चौहान वंश के वंशज राजा ज्वाला प्रसाद सिंह परंपरागत गद्दी पर विराजते हैं। इस अनुष्ठान की शुरुआत नौ दिनों के कठोर व्रत और कुलदेवी आशापूर्णा माई की विधि-विधान से आराधना के साथ होती है। नवमी के दिन देवी दर्शन के उपरांत उनका गद्दी पर बैठने का यह सिलसिला पीढ़ियों से चला आ रहा है।
वंश परंपरा के जानकारों के अनुसार, चौहान वंश के पूर्वज कभी राजस्थान के नीमराना से चलकर यमुना किनारे बसे थे और समय के साथ बमान गांव को अपनी राजधानी बनाया। आज भले ही राजाओं के साम्राज्य समाप्त हो चुके हैं, लेकिन इस परंपरा के माध्यम से सामाजिक सौहार्द और पारिवारिक जड़ें आज भी मजबूत बनी हुई हैं। नवरात्रि के अवसर पर लगने वाला यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह देश-विदेश में बसे चौहान वंश के लोगों को अपनी मिट्टी और संस्कृति से जोड़ने का बड़ा माध्यम है।
