लॉरेंस बिश्नोई गैंग का ‘लो-कॉस्ट डिस्पोजेबल शूटर’ मॉडल कैसे करता है काम | crime news
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई भले ही गुजरात की साबरमती जेल में बंद हो, लेकिन सलाखों के पीछे से उसका आपराधिक साम्राज्य लगातार फैल रहा है। हाल ही में अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले ने इस सिंडिकेट के काम करने के तरीके को देश के सामने ला दिया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह गैंग बड़े अपराधों के लिए पेशेवर हत्यारों की जगह ‘लो-कॉस्ट, डिस्पोजेबल शूटर्स’ का इस्तेमाल करता है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य मुख्य सरगनाओं का सुरक्षित बचना और जरूरत पड़ने पर मोहरों को आसानी से रास्ते से हटाना है।
अपराध की दुनिया में इस मॉडल की शुरुआत विदेशों और जेलों में बैठे मास्टरमाइंड्स द्वारा की जाती है। टाइगर श्रॉफ मामले में अमेरिका में छिपे गैंगस्टर अनिल पंडित ने हरियाणा, बिहार और सोनीपत के कम उम्र के लड़कों को चुना। ये वे लड़के थे जो पहले से ही छोटे-मोटे अपराधों में शामिल रहे थे। इन्हें चंद हजार रुपये, सोशल मीडिया पर भौकाल बनाने और विदेश भेजने का झूठा सपना दिखाकर टारगेट सौंपा जाता है।
सिद्धू मूसेवाला और बाबा सिद्दीकी हत्याकांड से लेकर हालिया घटनाओं तक, इस गैंग का एक तय पैटर्न रहा है। सबसे पहले विदेशी आका साजिश रचते हैं, फिर स्थानीय स्तर पर युवाओं की भर्ती होती है। ये लड़के महीनों तक रेकी करते हैं, टारगेट का रोजमर्रा का रूटीन खंगालते हैं और फिर मौका मिलते ही हमला कर देते हैं। इन्हें पैसों का भुगतान सीधे बैंक खातों की बजाय हवाला और कैश कूरियर के जरिए किया जाता है, जिससे पुलिस के हाथ वित्तीय सबूत न लग सकें।
इस तरह के संगठित अपराध नेटवर्क युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं, जिससे समाज में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चुनौतियां पैदा हो रही हैं। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इस स्लीपर सेल जैसे नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए नए सिरे से रणनीति तैयार कर रही हैं, ताकि युवाओं को इस दलदल में फंसने से रोका जा सके।
