जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी, कार्यकर्ताओं से पूछे कड़े सवाल | national news
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीजेपी कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत और न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई शुरू कर दी है। अदालत के इस रुख से मामले में कानूनी पेचीदगियां और गहरी हो गई हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं के आचरण और कानूनी प्रक्रियाओं पर कई तीखे सवाल उठाए।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस पूरे घटनाक्रम में दो मुख्य घटनाएं शामिल हैं। पहली घटना 10 अक्टूबर की थी जिसके बाद नोटिस जारी हुआ, जबकि दूसरी घटना 13 अक्टूबर की थी जब दोनों कार्यकर्ता कथित तौर पर बैरिकेड तोड़कर जंतर-मंतर पहुंचे। अदालत ने पूछा कि जब पहले ही शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरा जा चुका था, तो उसका उल्लंघन क्यों किया गया और क्या इस स्थिति में उन्हें कानूनी सुरक्षा का लाभ मिल सकता है।
न्यायाधीश ने बैरिकेड तोड़ने की घटना पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बैरिकेडिंग केवल प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए नहीं, बल्कि असामाजिक तत्वों को वहां पहुंचकर माहौल बिगाड़ने से रोकने के वास्ते होती है। अदालत ने पुलिस कार्रवाई और बीएनएसएस की धाराओं के तहत अपनाई गई प्रक्रिया पर भी विस्तार से जानकारी मांगी। इस मामले की अगली सुनवाई में प्रशासनिक और कानूनी पक्षों पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है।
