आगरा में बंदरों के आतंक से मिलेगी राहत, वन्यजीव संस्थान तैयार करेगा विशेष कार्य योजना | agra news
उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा में बंदरों का बढ़ता आतंक स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए बड़ी सिरदर्दी बन चुका है। शहर की तंग गलियों से लेकर प्रमुख पर्यटक स्थलों तक बंदरों के झुंड आए दिन राहगीरों को अपना शिकार बनाते हैं। इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए अब भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देहरादून ने कमान संभाली है और एक व्यापक कार्य योजना तैयार की जा रही है।
पारंपरिक तरीकों से हटकर इस बार बंदरों को पकड़ने और नियंत्रित करने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। आंकड़ों के मुताबिक, शहर में लगभग डेढ़ लाख बंदर मौजूद हैं, जिनमें से 30 हजार से अधिक अकेले ‘अल्फा’ श्रेणी के हैं जो काफी आक्रामक माने जाते हैं। कलेक्ट्रेट और नगर निगम परिसर में हर दिन बंदरों के हमलों से जुड़ी दर्जनों शिकायतें दर्ज की जाती हैं, जबकि जिला चिकित्सालय में एंटी-रैबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की कतार लंबी होती जा रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी कार्य योजना को मूर्त रूप लेने में एक से दो महीने का समय लग सकता है। योजना के तहत विशेषज्ञों की टीम जल्द ही आगरा का दौरा करेगी और मैदानी हालात का जायजा लेगी। स्थानीय स्तर पर बंदरों को खुले में खाना खिलाने पर रोक लगाने और डेडीकेटेड फीडिंग जोन बनाने की दिशा में भी काम किया जाना है, ताकि उनकी आवाजाही को आवासीय क्षेत्रों से दूर किया जा सके। इस वैज्ञानिक पहल से न केवल नागरिकों को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि वन्यजीवों के प्रबंधन में भी एक नया आयाम जुड़ेगा।
