संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करें युवा कानूनविद | national law university news
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के दीक्षांत समारोह में कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले नए स्नातकों को संबोधित करते हुए न्याय, स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने का आह्वान किया। यह दीक्षांत समारोह ऐसे समय में आयोजित हुआ जब कुछ बाहरी ताकतों के कारण कार्यक्रम को लेकर अनिश्चितता का माहौल बन गया था, लेकिन छात्रों के दृढ़ संकल्प ने इसे सफल बनाया।
बाहरी बाधाओं और चुनौतियों का जिक्र करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों ने इस आयोजन को बाधित करने की कोशिश की थी, परंतु यहां के प्रतिभाशाली छात्रों ने दमन की कायरतापूर्ण प्रवृत्ति के बजाय खुले संवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को चुना। छात्रों की इस परिपक्वता ने साबित कर दिया कि ईमानदार बहुमत की इच्छाशक्ति हमेशा साजिशों पर भारी पड़ती है।
छात्रों को अपने भावी जीवन के लिए मार्गदर्शन देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। इसमें केवल कानूनी धाराओं और अदालती फैसलों की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस और समाज के वंचित वर्ग की अनसुनी आवाजों को सुनने की विनम्रता भी उतनी ही आवश्यक है।
मुख्य न्यायाधीश ने युवा वकीलों को चेतावनी दी कि वे अपने पेशेवर जीवन में सुविधा या शॉर्टकट के लिए कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता न करें। उन्होंने कहा कि देश इन नए कानूनविदों को केवल वकीलों के रूप में नहीं, बल्कि संवैधानिक उम्मीदों के संदेशवाहकों के तौर पर देखता है, जिन पर समाज की बड़ी जिम्मेदारियां टिकी हैं।
