मेघालय का अनोखा कोंगथोंग गांव, जहां नाम के बजाय सीटी बजाकर बुलाते हैं लोग | travel-tourism
भारत में कई ऐसे स्थान हैं जो अपनी विशिष्ट संस्कृति और परंपराओं के कारण अलग पहचान रखते हैं। मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स जिले में स्थित कोंगथोंग गांव ऐसा ही एक अनूठा ठिकाना है, जिसे देश का एकमात्र ‘व्हिसलिंग विलेज’ यानी सीटी वाला गांव कहा जाता है। यहाँ पारंपरिक नामों से पुकारने की संस्कृति के स्थान पर संगीत की धुनों का उपयोग किया जाता है।
इस अनूठी परंपरा के पीछे एक दिलचस्प इतिहास और भूगोल जुड़ा हुआ है। कोंगथोंग गांव चारों तरफ से घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरा हुआ है। प्राचीन समय में जब ग्रामीण जंगलों में शिकार करने या लकड़ी काटने जाते थे, तब एक-दूसरे से संपर्क साधने के लिए सामान्य आवाजें काम नहीं आती थीं। इस समस्या से निपटने के लिए लोगों ने सीटी की विशेष धुनें निकालकर संवाद का यह अनोखा माध्यम विकसित किया, जो आज यहाँ की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।
जिंगरवाई लॉबई परंपरा की खासियत
यहाँ बच्चे के जन्म के बाद माता उसकी एक विशिष्ट धुन तैयार करती है। खासी समुदाय की मातृवंशीय परंपरा से जुड़ी इस प्रक्रिया को ‘जिंगरवाई लॉबई’ कहा जाता है। गाँव में हर व्यक्ति की अपनी एक अलग और स्थाई धुन होती है, जिससे उसकी पहचान होती है। जब कोई किसी को पुकारता है, तो वह उसी धुन में सीटी बजाता है। समय के साथ आधुनिकता के इस दौर में भी स्थानीय लोगों ने अपनी इस प्राचीन विरासत को पूरी शिद्दत से सहेज कर रखा है, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
यात्रा की जानकारी और मुख्य आकर्षण
शिलॉन्ग से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस गाँव तक पहुँचने के लिए सड़क मार्ग का उपयोग करना पड़ता है। घुमावदार पहाड़ियों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच का यह सफर अपने आप में एक रोमांचक अनुभव है। पर्यटकों के लिए यहाँ आने का सबसे उत्तम समय अक्टूबर से मई के बीच का माना जाता है, जब मौसम काफी सुहाना रहता है। इस क्षेत्र में आने वाले सैलानी स्थानीय खासी व्यंजनों का लुत्फ उठाने के साथ-साथ कम्युनिटी होमस्टे में ठहरकर ग्रामीण जीवनशैली को बेहद करीब से अनुभव कर सकते हैं।
