बिजली बिल में नाम-पता वापसी: करोड़ों ग्राहकों को मिली बड़ी राहत, जानिए क्या है पूरा मामला
बिजली विभाग ने अपने एक फैसले को पलटते हुए करोड़ों ग्राहकों को बड़ी राहत दी है। अगस्त माह से मिलने वाले बिजली बिलों में उपभोक्ताओं का नाम और पता फिर से स्पष्ट रूप से छपना शुरू हो गया है। पिछले महीने अचानक यह सुविधा बंद कर दी गई थी, जिससे उपभोक्ताओं को काफी परेशानी हो रही थी। कई लोग बिजली बिल को अपने पते के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करते हैं, ऐसे में इस बदलाव से उन्हें दिक्कतें आ रही थीं।
पावर कॉरपोरेशन ने पिछले महीने अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव किया था, जिसके कारण बिलों में नाम और पते के कई अक्षर ‘X’ के रूप में गायब हो रहे थे। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे विद्युत वितरण संहिता-2003 की भावना के विपरीत बताया था। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।
इस आपत्ति के बाद पावर कॉरपोरेशन ने अपने सॉफ्टवेयर में फिर से बदलाव किया है। अब उपभोक्ताओं को पहले की तरह नाम और पता स्पष्ट रूप से अंकित बिल मिल रहे हैं। अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली बिल सिर्फ भुगतान का जरिया नहीं, बल्कि आधार, पासपोर्ट, बैंक खाता, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे कई सरकारी दस्तावेजों के लिए पते के प्रमाण के तौर पर भी इस्तेमाल होता है। इसलिए बिल पर नाम और पता का होना उपभोक्ताओं का अधिकार है।
सूत्रों के अनुसार, पावर कॉरपोरेशन ने यह बदलाव लागू करने से पहले नियामक आयोग से अनुमति नहीं ली थी। नाम और पता सार्वजनिक न हो, इस मंशा से ‘X’ लिखने की व्यवस्था शुरू की गई थी, लेकिन इससे उपभोक्ताओं को हो रही परेशानी को नजरअंदाज कर दिया गया था। विरोध के बाद कॉरपोरेशन को यह फैसला वापस लेना पड़ा।
इस बीच, केंद्र सरकार की रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद बिजली सेवाओं में अपेक्षित सुधार न होने के आरोप भी लग रहे हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने खर्च की समीक्षा और जवाबदेही तय करने की मांग की है। आरडीएसएस के तहत स्मार्ट मीटर लगाने और बिजली ढांचे को ठीक करने जैसे काम प्रस्तावित हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को अभी भी बिजली आपूर्ति, शिकायत निवारण और बिलिंग व्यवस्था में सुधार का इंतजार है।
