मिलावट सहित 31 अपराधों में अब सीधे FIR नहीं, UP में बदले Prosecution rules
उत्तर प्रदेश में अब खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकेगी। अभियोजन निदेशालय ने 31 गंभीर अपराधों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत पुलिस को सीधे एफआईआर दर्ज करने से रोका गया है। इस निर्णय से मिलावटखोरों और अन्य मामलों में आरोपी लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है, क्योंकि अब शिकायतकर्ता को पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट में परिवाद दायर करना होगा।
क्या है नया नियम?
अभियोजन निदेशालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब पुलिस 31 विशिष्ट अपराधों में सीधे एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती है। इन मामलों में पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट में परिवाद (शिकायत) दायर करनी होगी। इन अपराधों में खाद्य पदार्थों में मिलावट, चेक बाउंस, घरेलू हिंसा, भ्रूण हत्या, पशुओं से अत्याचार, पर्यावरण प्रदूषण, बाल श्रम, उपभोक्ता धोखाधड़ी और ट्रेडमार्क उल्लंघन जैसे मामले शामिल हैं।
झूठे मामलों पर लगेगी रोक
इस नए नियम का उद्देश्य झूठी और बेबुनियाद शिकायतों पर एफआईआर दर्ज होने की प्रवृत्ति को रोकना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अदालती प्रक्रिया को मजबूत करेगा और पुलिस सिस्टम में सुधार लाएगा। पूर्व में व्यापारिक संगठन भी मिलावट के मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज करने का विरोध करते रहे हैं।
मिलावटी सामान को नष्ट करने के नियम में भी बदलाव
मिलावट के मामलों में कार्रवाई के दौरान पकड़े गए मिलावटी दूध, घी या पनीर को अब तुरंत नष्ट नहीं किया जाएगा। पहले खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी ऐसे सामान को तुरंत नष्ट कर देते थे। लेकिन अब नए नियम के तहत, मिलावटी सामान को सुरक्षित रखना होगा और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही उसे नष्ट किया जाएगा।
