‘यहां सब जानवर हैं, मरने दो…’ पूर्व सांसद अनिल वारसी के बयान से UP politics news में बवाल, ट्रक ड्राइवर की आत्महत्या पर भड़के
उत्तर प्रदेश में एक ट्रक ड्राइवर की आत्महत्या के बाद पूर्व सांसद अनिल वारसी ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ‘यहां सब जानवर हैं, मरने दो… एक दिन हम भी मर जाएंगे।’ यह टिप्पणी उन्होंने तब की जब वह आत्महत्या करने वाले ट्रक ड्राइवर के परिजनों से मिलने पहुंचे थे। वारसी ने पुलिस अधीक्षक (SP) पर निशाना साधते हुए कहा कि वे राजनीतिक कार्यक्रमों में व्यस्त हैं, जबकि जनता मर रही है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे UP politics news में हलचल मच गई है।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना बाघपुर में हुई, जहां एक ट्रक की टक्कर से कार क्षतिग्रस्त हो गई थी। कार सवारों ने 26 वर्षीय ट्रक चालक रंजीत कुमार की पिटाई कर दी। पुलिस को सूचना मिलने पर वह रंजीत को हिरासत में ले गई। हालांकि, बाद में ट्रक मालिक के हस्तक्षेप से दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और रंजीत को छोड़ दिया गया। लेकिन देर रात रंजीत ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पूर्व सांसद अनिल वारसी और उनकी पत्नी व राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला मौके पर पहुंचे। परिजनों से बातचीत के दौरान वारसी पुलिस की कार्यशैली पर भड़क गए। उन्होंने एसपी की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें मेरे आने से पहले यहां होना चाहिए था। उन्होंने एसपी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे गुड्डन सिंह के यहां होली खेलने और भोले सिंह के यहां तेरहवीं खाने में व्यस्त हैं। वारसी की यह टिप्पणी उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी देवेंद्र सिंह भोले (सांसद) से जुड़ी है।
विवादित बयान और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता
वारसी ने पुलिस अधिकारियों की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहां के लोग तो सब जानवर हैं, मरते हैं तो मरने दो। 52 सेकंड के इस वीडियो में वारसी की टिप्पणी के दौरान राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला चुपचाप खड़ी रहीं। हालांकि, बाद में मौके पर पहुंचे एएसपी राजेश पाण्डेय ने लोगों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। वारसी का यह बयान स्थानीय राजनीति में प्रतिद्वंद्विता और पुलिस प्रशासन के प्रति जनता के असंतोष को उजागर करता है।
