फर्जी नक्शे पास कराने वालों पर होगी कार्रवाई, High Court ने दिया सख्त आदेश
लखनऊ हाई कोर्ट ने फर्जी दस्तावेजों और गलत जानकारी के आधार पर भवन मानचित्र (बिल्डिंग मैप) स्वीकृत कराने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी ने गलत जानकारी देकर नक्शा पास कराया है, तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई अनिवार्य है और ऐसी स्वीकृति को निरस्त किया जा सकता है। न्यायालय ने यह भी कहा कि धोखाधड़ी से प्राप्त किसी भी अनुमति को कानून में संरक्षण नहीं मिल सकता और ऐसे मामलों में अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे सख्त कार्रवाई करें।
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने प्रतापगढ़ निवासी वंदना सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि विपक्षी सबीरा खातून ने भूमि की वास्तविक सीमाओं को छिपाकर और गलत विवरण देकर भवन निर्माण की अनुमति प्राप्त की थी। मामले की जांच में सामने आया कि स्वीकृत नक्शों में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। यहां तक कि नक्शे में दिखाए गए रास्ते और मार्ग स्थल पर मौजूद ही नहीं पाए गए। कोर्ट ने इसे प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी मानते हुए गंभीर टिप्पणी की।
न्यायालय ने कहा कि भवन निर्माण कार्यों का विनियमन अधिनियम 1958 की धारा 7-ए (धोखाधड़ी से प्राप्त अनुमति रद्द करना) और धारा 10 (अवैध निर्माण हटाना) दोनों अलग-अलग स्थितियों में लागू होती हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ यह कहकर कि धारा 10 के तहत कार्यवाही चल रही है, धारा 7-ए की कार्यवाही को समाप्त नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि दोनों धाराओं के तहत समानांतर कार्रवाई संभव है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि अवैध निर्माण भी हटे और धोखाधड़ी करने वाले पर भी कार्रवाई हो।
