डिजिटल अरेस्ट गैंग का पर्दाफाश: यूपी पुलिस ने 90 लाख ठगने वाले दो शातिरों को दबोचा, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का खुलासा
राजधानी लखनऊ में साइबर क्राइम सेल ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है जो ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों से करोड़ों की ठगी करता था। इस गिरोह के दो सदस्यों को राजस्थान और तमिलनाडु से गिरफ्तार किया गया है। ये शातिर खुद को एटीएस (ATS) और सीबीआई (CBI) के अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे और फिर उनसे भारी रकम ऐंठ लेते थे।
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने आलमबाग निवासी एक ट्रांसपोर्टर दंपती को निशाना बनाया था। जालसाजों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर दंपती पर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए। उन्हें जेल भेजने की धमकी दी गई और 14 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा, यानी कैमरे के सामने रहने को मजबूर किया। इस दौरान, अलग-अलग किस्तों में उनसे 90 लाख रुपये ठग लिए गए।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जितेंद्र यादव और मनोज यादव के रूप में हुई है। पूछताछ में पता चला है कि यह गिरोह जयपुर और तमिलनाडु से संचालित हो रहा था। जितेंद्र नए सदस्यों को जोड़ता था, जबकि मनोज ठगी की रकम को ‘म्यूल’ खातों में ट्रांसफर करता था। इससे पहले भी इस गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इस गिरोह का नेटवर्क भारत के बाहर इंडोनेशिया, म्यांमार और थाइलैंड तक फैला हुआ है। ठगी गई रकम का बड़ा हिस्सा क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशों में भेजा जाता था। विदेशी हैंडलर्स भारतीय ‘इंडिया हेड’ को निर्देश देते थे, जो आगे अपने गुर्गों से काम करवाता था। पुलिस अब गिरोह के मुख्य सरगना की तलाश कर रही है, जिसकी गिरफ्तारी से कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। इस तरह की ठगी आम जनता के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है, जिससे सतर्क रहने की आवश्यकता है।
