स्कूलों की मनमानी पर लगाम: अब सरकारी किताबें ही होंगी अनिवार्य, निजी प्रकाशकों पर कार्रवाई
आगरा में अभिभावकों और छात्रों को बड़ी राहत देते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी निजी स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब शैक्षिक सत्र 2026-27 से सरकारी निर्धारित किताबें ही अनिवार्य होंगी। यह फैसला स्कूलों द्वारा निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोपने की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान करेगा, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता था।
शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, यह कदम कमीशनखोरी पर अंकुश लगाएगा और शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ावा देगा। शासन के पूर्व आदेशों के बावजूद, कई स्कूल एनसीईआरटी या एससीईआरटी द्वारा तय की गई सरकारी पाठ्य-पुस्तकों की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें इस्तेमाल कर रहे थे।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जितेंद्र कुमार गोंड ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगले सत्र में केवल सरकारी निर्धारित किताबों का ही इस्तेमाल होगा। स्कूलों को 15 दिनों के अंदर अगले सत्र की पाठ्य-पुस्तकों की सूची प्रमाणित करके बेसिक शिक्षा कार्यालय में जमा करनी होगी। निर्देशों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जा सकती है और उनके खिलाफ विभागीय तथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रधानाचार्य और प्रबंधक इस आदेश के उल्लंघन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। अभिभावक यदि किसी स्कूल द्वारा महंगी प्राइवेट किताबें खरीदने के लिए बाध्य किए जाते हैं, तो वे आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं या सीधे जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। यह महत्वपूर्ण निर्णय हजारों परिवारों के लिए राहत लेकर आया है और शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
