ऑपरेशन सिंदूर का असर: पाकिस्तान को बनाना पड़ा नया पद, CDS जनरल अनिल चौहान ने बताई हार की कहानी
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने हाल ही में पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल में एक महत्वपूर्ण खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भले ही फिलहाल रुका हुआ हो, लेकिन यह पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। इस ऑपरेशन के दूरगामी प्रभाव पड़े हैं, जिसके चलते पाकिस्तान को अपनी सैन्य संरचना में बड़ा बदलाव करते हुए ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्स’ (CDF) जैसा एक नया पद सृजित करना पड़ा। यह पद पाकिस्तान की तीनों सेनाओं को एक केंद्रीकृत कमान के तहत लाने के उद्देश्य से बनाया गया है।
जनरल चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने पाकिस्तान को न केवल सैन्य स्तर पर, बल्कि संवैधानिक स्तर पर भी झुकने पर मजबूर किया। उन्होंने इसे पड़ोसी देश की करारी हार का स्पष्ट प्रमाण बताया। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि भारतीय सेना की कार्रवाई कितनी प्रभावी रही।
जनरल चौहान ने यह भी संकेत दिया कि भारतीय सेना आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए एक मानक प्रणाली विकसित कर रही है। यह प्रणाली भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सेना को और अधिक सक्षम बनाएगी। हाल के दिनों में, CDS ने भविष्य के युद्धों और आतंकवाद से निपटने के तरीकों पर कई महत्वपूर्ण बयान दिए हैं। उन्होंने कहा था कि भविष्य के युद्ध मल्टी-डोमेन ऑपरेशन होंगे और आतंकवाद से निपटने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे त्वरित एक्शन की आवश्यकता होगी। साथ ही, उन्होंने लंबी अवधि के युद्धों के लिए भी तैयार रहने की बात कही थी।
जनरल चौहान ने अपने पिछले बयानों में युद्ध जीतने के लिए केवल भाषणों के बजाय ठोस योजना और सतर्कता की आवश्यकता पर बल दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि युद्ध के तरीके लगातार बदल रहे हैं और भारतीय सेना को फ्यूचर वॉरफेयर के अनुसार खुद को तैयार करना ही एकमात्र विकल्प है।
यह भी सामने आया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान ने संघर्ष रुकवाने के लिए अमेरिका से लगभग 60 बार गुहार लगाई थी। अमेरिकी फर्म के सार्वजनिक हुए दस्तावेजों के अनुसार, पाकिस्तान ने अपने राजनयिकों के माध्यम से शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क कर लॉबिंग की थी, जो इस ऑपरेशन के प्रभाव को दर्शाता है।
